युग अपहरण हत्या मामले में अदालत ने तीनों दोषियों को सुनाई मौत की सजा

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जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की अदालत ने युग अपहरण हत्या मामले के तीनों दोषियों को मौत की सजा सुनाई है. दोषी चंद्र शर्मा, तेजिंद्र पाल और विक्रांत बक्शी को अदालत ने सजा-ए-मौत की सजा सुनाने के साथ अगले तीस दिनों तक हाईकोर्ट में अपील करने का समय दिया है. अदालत ने भारतीय दंड संहिता धारा 302,120 बी और 364 ए के तहत सजा ए मौत की सजा सुनाई. अदालत ने तीनों दोषियों को धारा 347 के तहत दोषी पाए जाने पर एक साल कठोर कारावास और 20 हजार जुर्माने की सजा, जुर्माना न देने की सूरत में  तीन माह की अतिरिक्त सजा. सबूत मिटाने और षडयंत्र रचने के लिए धारा 201 और 120 बी के तहत 7 साल की सजा.

50 हजार जुर्माने की सजा और जुर्माना न देने पर 6 माह अतिरिक्त कारावास. धारा 506,120 बी धमकी देने और षडयंत्र रचने का जुर्म साबित होने पर एक साल का कठोर कारावास और दस हजार जुर्माने की सजा सुनाई जुर्माना न अदा करने पर एक माह अतरिक्त कारावास की सजा तीनों दोषियों को सुनाई.

सजा का एलान सुनते ही अदालत में मौजूद युग के माता पिता की आंखों में आंसू छलक पड़े. अदालत ने इस मामले में 800 पन्नों की जजमेंट दी है. इसमें तीनों को हत्या, अपहरण, बंधक बनाने, साक्ष्य मिटाने और हत्या का षड्यंत्र रचने का दोषी करार दिया गया है.

शहर के कारोबारी विनोद गुप्ता के मासूम बेटे युग का फिरौती के लिए 14 जून, 2014 को अपहरण हुआ था. अभियोजन के अनुसार हत्यारों ने 23-24 जून की रात को युग को पत्थर से बांधकर भराड़ी पेयजल टैंक में फेंक दिया था.
अपहरण के दो साल बाद 22 अगस्त, 2016 को विक्रांत की निशानदेही पर सीआईडी ने भराड़ी पेयजल टैंक से युग का कंकाल बरामद किया. इसी दिन चंद्र शर्मा, तेजेंद्र पॉल को गिरफ्तार किया. इतने दिन पेयजल टैंक में कंकाल रहा और वही पानी संबंधित इलाकों में सप्लाई भी होता रहा. 25 अक्तूबर, 2016 को सीआईडी ने जिला एवं सत्र न्यायालय में आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश की.

20 फरवरी, 2017 को इस अपहरण और हत्या के मामले का शुरू हुआ ट्रायल 27 फरवरी, 2018 तक चला. तीनों दोषी युग को मोबाइल पर वीडियो गेम खेलने का लालच देकर गोदाम में ले गए और वहां उसके हाथ-पांव और मुंह पर टेप बांध दी. एक पेटी में डालकर उसे गाड़ी में राम चंद्रा चौक के पास किराये के मकान में ले जाया गया. मासूम युग को कई यातनाएं दी गईं। नशे में आरोपी उसे बुरी तरह प्रताड़ित करते रहे. बाद में पकड़े जाने के डर से आरोपियों ने युग के गले में एक बड़ा पत्थर बांधकर नगर निगम के पानी के स्टोरेज टैंक में जिंदा फेंक दिया था.



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