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वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, ताजमहल खुदा की संपत्ति, अगली सुनवाई 27 जुलाई को

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ताजमहल पर मालिकाना हक जताने वाला सुन्नी वक्फ बोेर्ड मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में शाहजहां के दस्तखत वाला वक्फनामा पेश नहीं कर पाया। बोर्ड ने कहा, "ताजमहल का असली मालिक खुदा है। जब कोई संपत्‍ति वक्फ को दी जाती है तो वह खुदा की संपत्‍ति बन जाती है।" वहीं, चीफ जस्टिस ने कहा कि बोर्ड अदालत का समय बर्बाद कर रहा है। बता दें कि बोर्ड ने पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट में दावा किया कि मुगल बादशाह शाहजहां ने बोर्ड के पक्ष में इसका वक्फनामा किया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सबूत के तौर पर शाहजहां के दस्तखत वाले दस्तावेज दिखाने को कहा था। ताज महल पर हक को लेकर सुन्नी वक्फ बोर्ड और आर्कियाेलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) के बीच विवाद चल रहा है।

ताजमहल पर दावेदारी कर रहा वक्फ बोर्ड मंगलवार को कोर्ट में नरम नजर आया। वक्फ बोेर्ड ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने कहा कि उसे ताजमहल को एएसआई की देख-रेख में बनाए रखने में कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन बोर्ड का यहां नमाज और उर्स जारी रखने का अधिकार बरकरार रहे। हालांकि बोर्ड ने कोर्ट में एक बार फिर दावा किया कि ताजमहल पर उसका अधिकार है। वहीं, एएसआई ने इसके लिए समय मांगा है। अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।

पिछली सुनवाई में वक्फ बोर्ड की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट वीवी गिरी ने कहा कि सुन्नी बोर्ड के पक्ष में शाहजहां ने ही ताज महल का वक्फनामा तैयार करवाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, आप हमें शाहजहां के दस्तखत वाले दस्तावेज दिखा दें। कोर्ट ने कहा था कि मुगलकाल का अंत होने के साथ ही ताज महल समेत अन्य ऐतिहासिक इमारतें अंग्रेजों को हस्तांतरित हो गई थी। आजादी के बाद से यह स्मारक सरकार के पास है और एएसअाई इसकी देखभाल कर रहा है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने कहा था, भारत में कौन यकीन करेगा कि ताज महल वक्फ बोर्ड का है? ऐसे मसलों पर सुप्रीम कोर्ट का वक्त बर्बाद नहीं करना चाहिए।

चीफ जस्टिस ने वक्फ बोर्ड के वकील से कुछ सवाल भी किए। जिसमें उन्होंने कहा, शाहजहां ने वक्फनामे पर दस्तखत कैसे किए? वह तो जेल में बंद थे। वह हिरासत से ही ताज महल देखते थे। गिरी के आग्रह पर कोर्ट ने एक हफ्ते की मोहलत दे दी थी।

सुन्नी वक्फ बोर्ड ने जुलाई 2005 में आदेश जारी कर ताज महल को अपनी प्रॉपर्टी के तौर पर रजिस्टर करने काे कहा था। एएसआई ने इसके खिलाफ 2010 में सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। इस पर कोर्ट ने बोर्ड के फैसले पर स्टे लगा दिया था। बता दें कि वक्फ का मतलब किसी मुस्लिम द्वारा धार्मिक, शैक्षणिक या चैरिटी के लिए जमीन का दान देना होता है।

एएसआई की ओर से पेश एडवोकेट एडीएन राव ने कहा कि वक्फ बोर्ड ने जैसा दावा किया है, वैसा कोई वक्फनामा नहीं है। 1858 की घोषणा के मुताबिक, आखिरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर से ली गई संपत्तियाें का स्वामित्व ब्रिटिश महारानी के पास चला गया था। वहीं, 1948 के कानून के तहत यह इमारतें अब भारत सरकार के पास हैं।



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