राज महाजन : 2019 तक क्या ये जीत बीजेपी कायम रख पाएगी?

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दोनों ही राज्यों में BJP ने अपना वर्चस्व कायम कर एक बार फिर यही साबित किया है कि मोदी मैजिक फेल नहीं हो सकता. हालाँकि इन चुनावों में बीजेपी की राज्यों में कुछ सीटें कम जरूर हुयी हैं. देखा जाये तो भारतीय जनता पार्टी हर मायने में विपक्ष से बेहतर है. परन्तु गुजरात में राहुल गाँधी को चेत हालत में देखकर लगा कि कांग्रेस आज भी जिन्दा है. वैसे सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगाते हुए ही देखा जाता था कांग्रेस को. 

भाजपा की जीत क्या सही मायने में पार्टी की जीत है? भाजपा विकास की बात लगातार करती रही थी और अब भी कर रही थी, लेकिन उसकी तरफ से मुख्य मुद्दा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही थे. उनका प्रधानमंत्री होना गुजरात को एक तरह का गर्व का अनुभव देता है. गुजरात में बीजेपी अपना किला बचाने में कामयाब रही, जबकि कांग्रेस के हाथ से उसने हिमाचल प्रदेश को छीन लिया. गुजरात में भाजपा पिछले 22 साल से सत्ता में है और अब राज्य के मतदाताओं ने एक और कार्यकाल के लिए उसे आदेश दिया है. जबकि हिमाचल प्रदेश में सिर्फ पांच साल के कार्यकाल के बाद कांग्रेस के खिलाफ ऐसा वातावरण बना कि मतदाताओं ने 68 सदस्यों वाली विधानसभा में उसे महज 21 सीटों पर संकुचित कर दिया. वहां 44 सीटें जीतकर भाजपा ने बड़ी विजय प्राप्त की है. गुजरात में तो वह हार से बाल-बाल बची है, जो उसके लिए संतोष की बात है. इसकी एक व्याख्या यह भी की जा रही है कि मोदी मैजिक आज भी बरकरार है. मोदी ने 40 रैलियों को संबोधित किया. उन्होंने गुजराती अस्मिता का दांव एक बार फिर खेला, जो चल पड़ा. जाहिर है, लोगों में बीजेपी से नाराजगी तो है, पर वे अभी इतने हताश भी नहीं हुए हैं कि सरकार बदलने के बारे में सोचें. हालांकि उन्होंने बीजेपी को एक झटका तो दे ही दिया है. राहुल अगर जमीनी स्तर पर युवा नेतृत्व को बढ़ावा दें तो बीजेपी के लिए कड़ी चुनौती पेश कर सकते हैं. बीजेपी को समझ लेना होगा कि केंद्र सरकार की योजनाएं अब जनता की कसौटी पर कसी जा रही हैं और समाज का एक बड़ा तबका खुद को आहत महसूस कर रहा है. हिंदुत्व और भावनात्मक मुद्दों की सीमाएं उजागर हो गई हैं और लोग ठोस नतीजे चाहते हैं. 

ये तथ्य भी उल्लेखनीय है कि भाजपा की सीटों में जरूर गिरावट आई, लेकिन उसके वोट प्रतिशत में वृद्धि हुई. फिर भी भाजपा को इस पर आत्मचिंतन करना चाहिए कि उसकी सीटें क्यों कम हुईं? फिलहाल, भाजपा को मोदी मैजिक का सहारा है. इसलिए प्रतिकूल स्थितियों में भी वह विजय प्राप्त कर रही है. मगर आदर्श स्थिति वो होगी, जब ऐसे हालात पैदा ही ना हों. भाजपा को ऐसा शासन देने की योजना बनानी चाहिए, जिससे लोग उत्साह के साथ उसे अपनी पहली पसंद बनाते रहें.     

जहाँ तक मेरी समझ के घोड़े दौड़ रहे हैं तो मुझे लगता है बेशक, 2017 के अंत में हुए इन चुनावों से हम 2019 के आम चुनावों के लिए कोई भविष्यवाणी नहीं कर सकते. लेकिन ये नतीजे इतना तो बताते ही हैं कि तब तक का समय राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण रहेगा



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