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आज सुलग रही है दुनिया की सबसे बड़ी ताकत अमेरिका- राज महाजन

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दुनिया का सबसे ताकतवर देश है अमेरिका। ताकत से किसी को भी झुकाया जा सकता है, डराया जा सकता है या यूँ कहें कि अपने वशबू में रखा जा सकता है। परन्तु आज ऐसा लग रहा है जैसे अमेरिका खुद ही डर गया है। आये दिन होने वाले हमलों ने उसे तोड़ कर रख दिया है। कभी आतंक का साया तबाही मचा देता है, तो कभी सीधा सा लगने वाला आम नागरिक। ताजा हुए हमले में ऐसा ही कुछ देखने को मिला है। एक 60 साल का व्यक्ति जिसका पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, गीत-संगीत में मग्न लोगों पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाता है। एक पल में करीब 60 लोग मारे जाते हैं, तकरीबन 550 के आसपास लोग घायल होते हैं। आप जानते हैं ये सब घटित होता है दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश में।

अमेरिका ऐसा देश है जहाँ बच्चे से लेकर बड़े सभी को हर बात की आज़ादी है। दुनिया के सबसे विकसित मुल्क में ऐसा खूनी खेल क्यों? किस बात ने निहत्थी भीड़ पर हमला करने के लिए एक बुजुर्ग को उकसाया? लास वेगास की खूनी घटना की कई व्याख्याएं हैं। एक व्याख्या है कि यह शहर भोग-विलास की नगरी है, अनियंत्रित उपभोक्तावाद का प्रतीक, जिसमें उपभोक्ता राजा होता है और अदालत, विधायिका, प्रशासन जैसी संस्थाओं का कर्तव्य होता है कि वे उपभोक्ता की इस आजादी की रक्षा करें। इस व्यवस्था से सर्वाधिक चिढ़ वैश्विक इस्लामी आतंकवाद को है।

चूंकि मामले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली है, सो माना जा सकता है कि यह एक आतंकी हमला है, जिसने व्यक्ति की स्वतंत्रता के अमेरिकी मूल्य को चुनौती दी है। लेकिन, इसमें बुजुर्ग का शमिल होना थोड़ा खटक रहा है। क्यूंकि इस बुज़ुर्ग(हत्यारे) के इस्लामिक स्टेट से जुड़े होने के कोई सबूत नहीं हैं। दूसरी व्याख्या है कि अमेरिका में नागरिकों को बंदूक रखने की छूट है, जिसका व्यापक दुरुपयोग हो रहा है। गोलीबारी की पुरानी घटनाओं को ध्यान में रखें, तो यह एक ठोस व्याख्या है।

ताज़ातरीन आंकड़ों के मुताबिक, 2017 में अभी तक अमेरिका में गोलीबारी की कुल 273 घटनाओं में 12,000 नागरिक मारे गये हैं। ये वाकई में बहुत बड़ा और हैरान करने वाला आंकड़ा है।

2002 से 2013 के बीच आतंकी घटनाओं से जितने अमेरिकी नागरिकों की मौत हुई, उससे 1,400 गुना ज्यादा अकारण गोलीबारी की घटनाओं में मारे गये। अगर बंदूक रखने की आजादी ही ऐसी भयावह घटनाओं की वजह है, तो फिर इस पर पाबंदी क्यूँ नहीं लगाई जा सकती। शायद इसलिए क्यूंकि अमेरिका में सुरक्षा के लिहाज से गन रखना अनिवार्य है और ये मौलिक अधिकारों में मन जाता है।

पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने वक्त में इस अधिकार के विरुद्ध कदम उठाना भी चाहा, परंतु ताकतवर बंदूक लॉबी के आगे वह सफल नहीं हो सके। राष्ट्रपति ट्रंप बंदूक से जुड़े मौजूदा कानून को जारी रखने के पक्षधर हैं। फिलहाल तो ऐसा कोई फैसला आने की उम्मीद नहीं की जा सकती। 

दूसरे विश्वयुद्ध के बाद से कोई साल नहीं गुजरा, जब अमेरिका ने कहीं न कहीं हमला न किया हो। अमरीका हमेशा युद्ध प्रेमी देश है। जो राष्ट्र हमेशा दूसरों पर मिसाइल दागता है, उसके सार्वजनिक जीवन को संचालित करने वाला कोई प्रतिष्ठान यह कहने का नैतिक अधिकार खो देता है कि हिंसा बुरी बला है। मैं गहरी सोच से कह सकता हूँ कि अमेरिका को अब आत्म मंथन करने की आवश्यता है।

 



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