WhatsApp की अफवाहों की वजह से 27 लोगों की मौत, जानिए भीड़ ने कहां-कहां निर्दोषों को बनाया शिकार

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हम लोग 21वीं सदी में जी रहे हैं. जहां सूचनाएं बड़ी तेजी से सोशल मीडिया, व्हाट्सएप, टेक्स्ट संदेशों के जरिए एक-दूसरे के पास भेजी जाती हैं. कई बार यह सूचनाएं आपके लिए फायदेमंद होती हैं तो कई बार इसकी वजह से किसी बेकसूर को अपनी जिंदगी गंवानी पड़ती है. आम तौर पर देखा जाता है कि लोग सोशल मीडिया पर आए मैसेज को बिना सोचे-समझे आगे आगे भेज देते हैं. कई बार सालों पुराने वीडियो को वायरल करके उसका फायदा उठाने की कोशिश की जाती है. आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां इंसान के पास किसी घटना की पुष्टि करने का समय नहीं है वहां पर व्हाट्सएप पर आया एक मैसेज एक गलत मानसिकता और उग्र भीड़ को जन्म देता है जिसके कारण अब तक 27 लोगों की जान चली गई है. इन घटनाओं में पीड़ित को अपना पक्ष रखने का मौका तक नहीं दिया जाता और भीड़ खुद फैसला करने पर उतर आती है.

व्हाट्सएप और फेसबुक पर बिना किसी खबर की पुष्टि किए लोगों ने मैसेज फॉर्वर्ड किए जिसके कारण पिछले साल मई से लेकर जुलाई तक 27 लोग मारे गए। किसी को बच्चा चोरी के शक में तो किसी को बच्चों के अंगों की तस्करी के शक में भीड़ ने मार दिया। कई बार मजाक में तो कई बार सोची-समझी साजिश के तहत अफवाहों को जन्म दिया जाता है। जिसके बाद भीड़ उसपर टूट पड़ती है और उसे बड़ी ही निर्दयता से मार देती है। 27 लोगों की मौत के बाद जागी सरकार ने व्हाट्सएप को नोटिस भेजा है और अफवाहों को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। आज हम आपको बताते हैं अफवाह के चलते भीड़ ने किसको और कहां अपना शिकार बनाया है.

तमिलनाडु में 65 साल की रुकमणी अपने रिश्तेदार के साथ मंदिर जा रही थीं। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने गांववालों से रास्ता पूछा. रुकमणी ने पास में खेल रहे बच्चों को चॉकलेट दीं. जैसे ही वह निकलीं अफवाह फैल गई कि उन्होंने बच्चों को लालच देने के लिए चॉकलेट दी हैं. जिसके बाद 200 लोगों की भीड़ ने उन पर हमला कर दिया.

कर्नाटक में 26 साल के कालू राम जोकि राजस्थान के एक मजदूर थे. उन्हें दिन के 1.30 बजे 50 लोगों ने घेरकर मार दिया. काम की तलाश में कालू बंगलूरू आए थे. वह अकेले जा रहे थे कि तभी वहां मौजूद दो लोगों ने उसे देखा और पीछा किया. अचानक भीड़ इकट्ठा हुई जिसने बिना सोचे-समझे जिसके हाथ जो लगा उसी से पीड़ित को पीटना शुरू कर दिया.

तेलंगाना में 33 साल के ऑटोरिक्शा ड्राइवर एन बालाकृष्णा कोरेमुल्ला गांव के रहने वाले थे. वह 18 किलोमीटर दूर जियापल्ली अपने रिश्तेदार से मिलने के लिए पहुंचे थे. उन्हें ताड़ी की दुकान के बाहर 50 लोगों की भीड़ ने केवल इसलिए मार दिया क्योंकि वह उन्हें यह विश्वास दिलाने में नाकाम रहे कि वह बच्चा चोर करने वाले गैंग से नहीं हैं.

आसाम में 30 साल के अभीजित नाथ और 29 साल के निलोत्पल दास. दोनों ही गुवाहाटी के रहने वाले थे उन्हें शाम के 7.30 बजे 500 लोगों की भीड़ ने बच्चा चोर होने के शक में पीट-पीटकर मार दिया.

पश्चिम बंगाल में 30 साल के बीमार व्यक्ति को 60 लोगों की भीड़ ने हत्या कर दी. वहीँ छत्तीसगढ़ में एक अज्ञात शख्स, पुलिस के अनुसार वह मानसिक विकलांग था. उसे 15 लोगों ने इसलिए मार दिया क्योंकि वह अपनी निर्दोषता को साबित नहीं कर पाया था.

त्रिपुरा में 30 साल के जहीर खान जोकि एक रेहड़ीवाले थे उन्हें 1000 लोगों की भीड़ ने मार दिया. वह अपने तीन साथियों के साथ माल बेचने के लिए वैन से यात्रा कर रहे थे तभी भीड़ ने हमला कर दिया. वहीँ 33 साल की सुकंता चक्रवर्ती एक एनाउंसर थी जिन्हें कि जागरुकता फैलाने के लिए अधिकारियों ने नौकरी पर रखा था. उन्हें दोपहर के तीन बजे 2000 लोगों की भीड़ ने बाजार में मार दिया. एक अज्ञात महिला थी उन्हें और एक महिला पर भीड़ ने हमला कर दिया. 

महाराष्ट्र में 36 साल के दादाराव भोसले और उनके 45 साल के भाई भरत, 45 साल के भरत माल्वे, 20 साल की आगनू श्रीमत इंगोले और 47 साल के राजू भोसले। पांचों एक ही परिवार के और खानाबदोश गोसावी समुदाय से ताल्लुक रखते थे। उन्हें 3,500 लोगों की भीड़ ने मार दिया. 
व्हाट्सएप पर भेजे जा रहे संदेश कौन भेजता है, कहां से आते हैं इसका पता किसी को नहीं होता है. मगर जब बात बच्चों की सुरक्षा की आती है तो कोई भी इस बात की पुष्टि नहीं करता कि यह सच है या झूठ. व्हाट्सएप पर जंगल की आग की तरह अफवाहें फैलाई जाती हैं. इसके कारण एक राज्य के लोगों को दूसरे राज्य के नागरिकों के खिलाफ भड़काने का काम भी हो रहा है.

इन बातों का रखें ख्याल

1. यदि आपके पास बच्चा चोरी, अंग निकालने वाले किसी गिरोह आदि का कोई संदेश या वीडियो आते है तो बिना सोचे-समझे उसे आगे फॉरवर्ड ना करें.
2. व्हाट्सएप को नफरत फैलाने का जरिया ना बनाएं.
3. भड़काऊ या उकसाने वाले संदेशों की सत्यता की जांच किए बगैर उन्हें प्रसारित करने से बचें.



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