वजन बढ़ने के साथ कमजोरी हो रही है महसूस तो यह इस बीमारी के प्रमुख लक्षण हो सकते है

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कई बार ऐसा होता है कि वजन बढ़ने पर साथ ही कमजोरी भी महसूस होती है. ऐसे में समझ नहीं आता कि इसकी वजह क्‍या हो सकती है. दरअसल इसकी वजह ये है कि लोग वजन बढ़ने को स्‍वस्‍थ होने से जोड़कर देखने लगते हैं. पर ऐसा होता नहीं है. डॉक्‍टर्स का कहना है कि अगर वजन बढ़ने के साथ आपको कमजोरी या चक्‍कर आना महसूस हो तो ये टाइप-2 डायबिटीज का प्रमुख लक्षण होता है.

हार्ट केयर फाउंडेशन (एचसीएफआई) के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा, ‘जब हमारा वजन बढ़ता है तो हमें अधिक ताकत हासिल करनी चाहिए और जब हम अपना वजन कम करते हैं तो हमें ताकत कम करनी चाहिए. यह एक मौलिक चिकित्सा सिद्धांत है. अगर हम वजन हासिल करते हैं और कमजोर महसूस करते हैं तो यह एक बीमारी है और जब हम अपना वजन कम करते हैं और ताकत हासिल करते हैं तो हम बीमारी से उबर जाते हैं’.

उन्होंने कहा, ’20 साल की आयु के बाद एक साथ पांच किलोग्राम से अधिक वजन नहीं बढ़ना चाहिए. उसके बाद वजन बढ़ना केवल वसा के संचय के कारण होगा, जो इंसुलिन प्रतिरोध पैदा करता है. इंसुलिन प्रतिरोध भोजन को ऊर्जा में बदलने की अनुमति नहीं देता है. इंसुलिन प्रतिरोध की स्थिति में, आप जो भी खाते हैं, वह वसा में परिवर्तित हो जाता है. चूंकि यह ऊर्जा में परिवर्तित नहीं होता है इसलिए आपको कमजोरी महसूस होती है’.

डॉ. अग्रवाल ने कहा, ‘जब आप दवाओं या चहलकदमी द्वारा इंसुलिन प्रतिरोध को कम करते हैं तब मेटाबोलिज्म सामान्य हो जाता है और आप जो भी खाते हैं वह ऊर्जा में परिवर्तित होता जाता है और आप ताकत हासिल करना शुरू कर देते हैं’.

वहीं सीनियर कंसल्टेंट डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. अनूप मिश्रा ने कहा, ‘एक आदर्श वजन हासिल करना महत्वपूर्ण नहीं है. मोटापे में मधुमेह की शुरुआत को रोकने के लिए वजन कम करना चिकित्सा उद्देश्य है’.

उन्होंने कहा, ‘मिठास वाले पेय से कैलोरी में कमी लाने पर (प्रतिदिन केवल एक सर्विंग लेकर) 18 महीनों में लगभग दो-डेढ़ पाउंड वजन कम किया जा सकता सकता है. ठोस आहार के सेवन से शरीर सेल्फ-रेगुलेट कर सकता है. हालांकि हम जो पीते हैं, उस पर यह लागू नहीं होता है. शरीर लिक्विड कैलोरी को समायोजित नहीं करता है इसलिए समय के साथ इससे वजन बढ़ने लगता है’.



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