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राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार के विवादित अध्यादेश के दवाब के चलते अब मौजूदा रूप में बिल पास नहीं होगा. गैग बिल को लेकर वसुंधरा राजे की मंत्र‍ियों के साथ हुई बैठक में ये फैसला लिया गया है. बैठक में भाजपा विधायकों ने ही बिल का विरोध किया.

इस बिल पर कांग्रेस ने विधानसभा के बाहर भारी विरोध प्रदर्शन किया है. वहीं, जयपुर में पत्रकार भी विधानसभा की ओर मार्च प्रदर्शन कर रहे हैं. कांग्रेस के विरोध के बाद गैग बिल सेलेक्ट कमिटी को भेजा गया.

इस बिल के खिलाफ कल से विरोध चल रहा है, जब से विधानसभा में इसे पेश किया गया है. भाजपा सरकार के इस बिल का विपक्ष के साथ-साथ उसकी पार्टी के नेता भी विरोध कर रहे हैं. इस बिल के तहत मौजूदा और पूर्व न्यायाधीशों, मजिस्ट्रेटों और सरकारी कर्मचारियों को उनकी ड्यूटी के दौरान किए गए किसी काम की जांच से बचाया गया है.

अध्यादेश के मुताबिक , इन लोगों के खिलाफ पुलिस या कोर्ट में शिकायत करने के लिए सरकार की अनुमति लेनी होगी. ड्यूटी के दौरान यदि सरकारी कर्मचारियों के​ खिलाफ कोई शिकायत की जाती है तो उसके खिलाफ सरकार की अनुमति के बिना कोई FIR दर्ज नहीं हो सकती.

वहीं, अध्यादेश किसी मामले से संबंधित सरकारी कर्मचारी के नाम, पते, तस्वीर और परिवार की जानकारी के प्रकाशन और प्रचार पर रोक लगाता है. यह अध्यादेश मीडिया में जानकारी प्रकाशित करने पर भी रोक लगाता है. इसका उल्लंघन करने वाले को 2 वर्ष तक की सजा हो सकती है.



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