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वरूथिनी एकादशी 2018 का जानें शुभ मुहूर्त, व्रत कथा, विधि और पारण का नियम

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वैशाख महीने में कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को बरुथिनी एकादशी कहा जाता है. माना जाता है बरुथिनी एकादशी करने से मनस्ताप दूर हो जाता है.
 
एक नज़र शुभ मुहूर्त पर-

एकादशी तिथि: 11 अप्रैल 2018 को शाम 06:40 बजे से शुरू होकर 12 अप्रैल को रात 08:12 बजे तक. एकादशी उदया तिथि में ही मनाई जाएगी. यानी 12 अप्रैल 2018 को ही बरुथिनी एकादशी मनाई जाएगी.
पारण का समय: 13 अप्रैल को सुबह 06:01 से 08:33 बजे तक
पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय: 09:04 बजे

जानें व्रत-विधि- एकादशी के दिन भगवान विष्णु का पूजन कर भजन कीर्तन करना चाहिए. द्वादशी के दिन पूजन कर ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए. दक्षिणा देकर विदा करने बाद स्वयं भोजन ग्रहण करना चाहिए. 

जानें व्रत कथा- नर्मदा नदी के किनारे मांधाता नाम का एक दानशील और तपस्वी राजा अपना राज्य खुशीपूर्वक चलाता था. राजा बहुत धार्मिक था और अपनी प्रजा को हमेशा खुश रखता था. एक बार राजा ने जंगल में तपस्या शुरू कर दी. इतने में जंगली भालू राजा को अकेला देख राजा का पैर खाने लगा. भालू यहीं नहीं रुका. वह राजा को घसीटता हुआ जंगल लेकर जाने लगा. राजा यह देख घबरा गए, लेकिन उन्होंने भालू को मारा नहीं और ना ही उसके साथ हिंसा की. राजा ने भगवान विष्णु की प्रार्थना शुरू कर दी. भगवान विष्णु प्रकट हुए और उन्होंने अपने सुदर्शन चक्र से भालू का वध कर दिया.
राजा की जान तो बच गई लेकिन उनका पैर भालू खा चुका था. राजा अपने अधूरे पैर को देख बहुत निराश हुए और भगवान विष्णु से हाथ जोड़ पूछने लगे कि हे प्रभू ऐसा मेरे साथ क्यों हुआ. भगवान विष्णु ने बताया कि तुम्हारे पूर्व जन्म के कर्मों के कारण ही आज तुम्हारा यह हाल हुआ है. राजा ने भगवान विष्णु से इसका कोई उपाय पूछा. भगवान नारायण ने कहा कि दुखी मत हो भक्त. तुम मेरी वाराह अवतार मूर्ति की पूजा करो और बरुथिनी एकादशी का व्रत करो. इनके प्रभाव से तुम फिर से पूरे अंगो वाले बन जाओगे. राजा ने नारायण के कहे अनुसार इस व्रत को अपार श्रद्धा से किया. कुछ दिनों के बाद ही राजा को अपने पैर वापस मिल गए.

कब खोले व्रत: एकादशी व्रत के अगले दिन यानी कि द्वादशी तिथि को व्रत समाप्त करने को ही पारण करते हैं. द्वादशी तिथि को सूर्योदय के बाद ही पारण किया जाता है. ध्यान रहे कि किसी भी हाल में एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले कर लेना चाहिए. यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो गई हो तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के बाद ही होता है. ऐसी मान्यता है कि व्रत रखने वाले जातक यदि द्वादशी तिथि में पारण नहीं कर पाते हैं तो वह पाप के भागी बनते हैं.

पारण को लेकर एक नियम यह भी है कि एकादशी व्रत का पारण हरि वासर में नहीं करना चाहिए. यदि आप व्रत कर रहे हैं तो व्रत तोड़ने से पहले हरि वासर की अवधि खत्म होने का इंतजार करें. हरि वासर द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई अवधि है. आमतौर पर सूर्योदय से पहले ही यह अवधि समाप्त हो जाती है. व्रत हमेशा सुबह-सुबह ही खोलना चाहिए. दोपहर के समय व्रत ना खोलें. अगर किसी वजह से आप सुबह व्रत नहीं खोल पाए हैं तो दोपहर में व्रत समाप्त ना करके इसके बाद करें.

इस दिन 10 बातें त्यागने योग्य होती हैं. बरुथिनी एकादशी व्रत से पहले कांस, उड़द, मसूर, चना, कोदो, शाक, मधु, किसी दूसरे का अन्न, दो बार भोजन तथा काम क्रिया इन दस बातों का त्याग करना चाहिए. इन से रहित मानव जीवन कुंदन की तरह चमक उठता है. ऐसे जातकों को समाज में प्रतिष्ठा प्रापत होती है. इस बार बरुथिनी एकादशी 12 अप्रैल को है.
 



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