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उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के जनता मिलन समारोह में जमकर हंगामा हुआ. 25 साल से दुर्गम इलाके में नौकरी कर बच्चों को पढ़ा रही महिला ने सीएम से ट्रांसफर की मांग की. इसके बाद यहां कुछ ऐसा हुआ कि बवाल हो गया. फरियाद नहीं सुने जाने पर महिला ने शोर मचाया. इस पर सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत भड़क गए. उन्होंने महिला से बार-बार कहा कि ‘सस्पेंड कर दूंगा बता दिया मैंने तुमको. सस्पेंड हो जाओगी. इसको सस्पेंड कर दीजिए. सस्पेंड कर दो. ले जाओ इसे बाहर. ले जाओ इसको. इसको कस्टडी में ले जाओ.’ इसके बाद भड़की महिला ने सीएम को अपशब्द कहे. और बुरा भला कहती रही जब तक पुलिस उसे बाहर नहीं ले गई. महिला को पुलिस ने हिरासत में लिया है.

इस मामले में पूर्व सीएम हरिश सिंह रावत ने कहा कि ‘हमारी प्रणाली इतनी असंवेदनशील हो गई है कि एक विधवा शिक्षक 25 साल तक रिमोट एरिया में तैनात रहे और कोई भी उसकी बात सुने?’ वर्तमान सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को सलाह देते हुए हरीश रावत ने कहा कि, ‘उन्हें निबंलित शिक्षिका को छोड़ देना चाहिए और उसके निलंबन का आदेश वापस लेना चाहिए.’

महिला ने सीएम से अपनी बात कही. इस पर सीएम ने महिला से कहा कि नौकरी लेते वक्त उन्होंने क्या लिख कर दिया था? इस पर टीचर उत्तरा ने जवाब दिया कि यह लिखकर नहीं दिया था की जीवन भर वनवास में रहेगी. इसके बाद हंगामा शुरू हुआ. सीएम ने महिला को हिरासत में लेने के आदेश दे दिए. इस पर महिला ने सीएम को अपशब्द कह दिए.

दरअसल, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के नौगांव स्थित प्राइमरी स्कूल में उत्तरा बहुगुणा नाम कि महिला टीचर है. इस दुर्गम इलाके में वह पिछले 25 साल से पढ़ा रही है. बताया जा रहा है की महिला लंबे समय से अपने ट्रांसफर की गुहार लगा रही थी. वह गुरुवार को जनता दरबार में सीएम से ट्रांसफर कि गुहार लेकर ही पहुंची थी. महिला का कहना है की वह अब अपने बच्चों के साथ रहना चाहती है. उसके पति की मौत हो चुकी है. वह अपने बच्चों को अकेला नहीं छोड़ना चाहती.

घटना का विडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. कई लोग महिला के अपशब्दों को लेकर उसकी आलोचना कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि सीएम को ऐसा बर्ताव नहीं करना चाहिए. वहीं, कई लोग सीएम द्वारा इस तरह का रवैया अपनाए जाने पर आपत्ति जता रहे हैं.



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