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‘रसूकदारों से डरा सिस्टम’- राज कुमार गुप्ता

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उत्तरप्रदेश के उन्नाव के गैंगरेप के प्रकरण ने पूरे देश को फिर से हिला कर रख दिया है. ये दुष्कर्म मीडिया के सामना आया तभी से इस पर सियासत दांव-पेंच खेले जाने लगे. पिछले कुछ दिनों में इस मामले से सम्बंधित जो भी कुछ हुआ उससे यही लग रहा था कि आम आदमी की कहीं कोई सुनवाई नहीं है. परन्तु इस मामले पर सूबे के मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद आरोपी को पकड़ने के निर्देश दिए हैं. 

इस मामले ने लोगों में प्रचलित इस धारणा को और पक्का किया है कि ताकतवर व्यक्ति या समुदाय आज भी पूरे सिस्टम को उंगलियों पर नचा रहे हैं और एक साधारण व्यक्ति का सुरक्षित रहना सिर्फ एक संयोग है, और तो और, उसके साथ अन्याय होने पर उलटे उसी को दोषी भी ठहरा दिया जाता है. उन्नाव के एक गांव की लड़की का आरोप है कि विधायक कुलदीप सेंगर और उनके साथियों ने उसके साथ गैंगरेप किया. लड़की थाने में शिकायत करने गई तो रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई. अवगत करा दें, आरोपी विधायक भारतीय जनता पार्टी का है. इसी वजह से इस मामले पर सियासत कुछ ज्यादा ही हो रही है. 

अदालत के आदेश पर कई दिनों बाद मामला दर्ज हुआ तो केस वापस लेने का दबाव शुरू हो गया. पीड़िता के परिजनों को इतना परेशान किया गया कि उन्होंने मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह करने की कोशिश की. इसके बाद लड़की के पिता को झूठे आरोपों में फंसाकर गिरफ्तार कर लिया गया. हद तो तब हो गयी जब पुलिस की कस्टडी में ही उनकी तबीयत खराब हुई और मौत हो गई. पिता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफ है कि उनकी मौत पिटाई से हुई. फिर यह भी पता चला कि जिस जेल में पीड़िता के पिता बंद थे, उसमें कई चीजों की सप्लाई का जिम्मा विधायक के एक रिश्तेदार का था. 

पीड़ित परिवार का कहना है कि पुलिस प्रशासन विधायक को बचा रहा है, जबकि आरोपी विधायक पीड़िता के परिवार और अपने परिवार के बीच पुरानी रंजिश का हवाला देते हुए इसे अपने खिलाफ साजिश बता रहे हैं.

पूरे प्रकरण में 6 पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई और तत्काल प्रभाव से उन्हें सस्पेंड कर दिया गया. इससे पीड़ित पक्ष के आरोप को मजबूती मिलती है. जो भी हो, मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए और इसका हर पहलू सामने आना चाहिए. मामला भले ही उत्तरप्रदेश से सम्बंधित हो, लेकिन यह हमारे सिस्टम के लिए यह एक टेस्ट केस है. अगर यह टेस्ट फेल हुआ तो क़ानून व्यवस्था की पोल खुल जायेगी.

टेस्ट इसलिए कहा जा रहा है क्यूंकि जिन भी मामलों में आरोपी का संबंध शासन में मौजूद सरकार से होता है, उनमें जांच भूलभुलैया में भटककर रह जाती है. अब ये रह जाती है या फिर जबरन छोड़ी जाती है. यह तो सही और निष्पक्ष जांच से पता चेलगा. फिलहाल राज्य सरकार से यही उम्मीद की जा सकती है कि सही दोषियों को पकड़कर जल्दी ही सजा दी जानी चाहिए.  



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