तुर्की में 3 महीने के लिए आपातकाल, राष्ट्रपति एर्दोगन ने की घोषणा

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तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने पुरे देश में 3 महीने के लिए आपातकाल की घोषणा कर दी है और साथ ही यह संकल्प भी लिया है कि, वो पिछले हफ़्ते तख्तापलट की कोशिश के लिए ज़िम्मेदार आतंकवादी समूह का पता लगा कर उनका खात्मा करेंगें. राष्ट्रपति एर्दोगन ने इस्लामिक धर्मगुरु फतहुल्ला गिलेन के अनुयाई को इस घटना का ज़िम्मेदार ठहराया है.

तख्तापलट की कोशिश में फंसे 50,000 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. और संदिग्ध साजिशकर्ताओं को उनके पदों से बर्खाश्त कर दिया है. राष्ट्रपति भवन से एर्दोयन ने कहा कि, तख्तापलट की कोशिश में शामिल आतंकवादी के समूह के सभी तत्वों को तेज़ी से समाप्त करने के लिए आपातकाल की घोषणा की ज़रूरत थी. इस कदम से सरकार की सुरक्षा सम्बन्धी शक्तियां बहुत बढ़ जायगी.

एक अधिकारी ने कहा कि, आपातकाल की घोषणा से सरकार को गतिविधि की स्वतंत्रता प्रतिबंधित करने की अतिरिक्त शक्तियां मिलेंगी. इससे वित्तीय एवं वाणिज्यिक गतिविधियों पर रोक नहीं लगेगी क्योंकि अंतरराष्ट्रीय कानून इन प्रतिबंधों की सीमाएं निर्धारित करता है.

2002 में तुर्की ने आपातकाल की स्थिति हटाई थी, जो 1987 में कुर्द विद्रोहियों के खिलाफ़ लड़ाई के लिए दक्षिण-पूर्व के प्रान्तों में लागू की गई थी. संविधान का अनुच्छेद 120 भी कहता है कि, हिंसात्मक गतिविधियों के कारण सार्वजनिक व्यवस्था गंभीर से रूप से बिगड़ने के अवसर पर आपातकाल लागू करने की अनुमति है. 

तुर्की अधिकारियों ने तख्तापलट की नाकाम कोशिश के बाद पुलिस, जजों, अध्यापकों और अन्य लोक सेवकों को गिरफ्तार किया है या उन्हें गोली मार दी. तुर्क नेता की इस कार्यवाई की कई लोगों ने आलोचना की है. जॉन केरी ने कहा था कि, हम तख्तापलट की निंदा करते हैं, लेकिन ये महत्वपूर्ण है कि, इसकी जवाबी कार्यवाई के दौरान उस लोकतंत्र का पूरा सम्मान किया जाये, जिसका हम समर्थन करते हैं.

तो वहीं जर्मन के चांसलर एंगेला मार्केल के प्रवक्ता  ने कहा कि, हम तुर्की में हर दिन ऐसे नये कदम उठते देख रहें हैं, जो कानून व्यवस्था का मजाक उड़ाते हैं और समानता के सिद्धांत का अपमान करते हैं. इस पर तुर्की रष्ट्रपति एर्दोगन ने कहा की गिफ्तारियां और निलंबन कानून के दायरे में रहकर किये गये हैं. और निस्संदेह इसका अर्थ ये नहीं है कि इसका अंत हो गया है. 
 



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