शुक्रवार की रात करें इन मंत्रो का जाप, बरसेगी माँ लक्ष्मी की कृपा

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धन के बिना मनुष्य अपना मान-सम्मान सब खो बैठता है. धन की देवी मां लक्ष्मी मनुष्य की इस परेशानी का हल करती हैं. परन्तु मां लक्ष्मी चंचला होती हैं. यानी वह एक स्थान पर टिकती नहीं हैं. धन को स्थाई बनाने के लिए मां लक्ष्मी की पूजा गुप्त तरीके से होती है और मंत्रों का उच्चारण करना पड़ता है. 

हिन्दूशास्त्रों में कहा गया है कि महालक्ष्मी के आठ स्वरूप हैं. इन आठों स्वरूपों में लक्ष्मी जी जीवन के आठ अलग-अलग वर्गों से जुड़ी हुई हैं. कहते हैं इन आठ रूपों की पूजा गुप्त तरीके से की जाए तो मानव जीवन सफल हो जाता है. ये अष्ट लक्ष्मी और उनके मूल बीज मंत्र इस प्रकार हैं.

श्री विजय लक्ष्मी यां वीर लक्ष्मी – ये जीवन में जीत और वर्चस्व को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है – ॐ क्लीं ॐ।।. 
श्री विद्या लक्ष्मी – ये जीवन में बुद्धि और ज्ञान को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है – ॐ ऐं ॐ।।
श्री आदि लक्ष्मी – ये जीवन के प्रारंभ और आयु को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है – ॐ श्रीं।।. 
श्री संतान लक्ष्मी – ये जीवन में परिवार और संतान को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है – ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं।।
 श्री ऐश्वर्य लक्ष्मी – ये जीवन में प्रणय और भोग को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है – ॐ श्रीं श्रीं।
श्री धान्य लक्ष्मी – ये जीवन में धन और धान्य को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है – ॐ श्रीं क्लीं।।
श्री धैर्य लक्ष्मी – ये जीवन में आत्मबल और धैर्य को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है – ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं।।
श्री गज लक्ष्मी – ये जीवन में स्वास्थ और बल को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है – ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं।।



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