नवरात्र 2017 : मां के इस मंदिर में मन्नत पूरी होने पर चढ़ाएं जाते है घोड़े, जानें क्यों

2017-09-24_temple65.jpg

देवीकूप शक्तिपीठ 51 शक्तिपीठों में से एक है. हरियाणा का कुरुक्षेत्र शक्तिपीठ जिसे 'श्रीदेवीकूप' कहा जाता है, 'भद्रकाली पीठ' के नाम से मान्य है. इस शक्तिपीठ का इतिहास दक्षकुमारी सती से जुड़ा हुआ है. देवी सती के आत्मदाह के बाद जब भगवान शिव देवी सती का देह लेकर ब्रह्मांड में घूमने लगे तो भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से देवी सती के शरीर के 52 हिस्से कर दिए. बताया जाता है कि ऐसा उन्होंने सती के प्रति भगवान शिव का मोह तोड़ने के लिए किया ​था. हिस्से होने के बाद जहां-जहां देवी सती के शरीर के भाग गिरे थे, वहां-वहां शक्तिपीठ स्थापित हुए. जिन्में से एक देवीकूप शक्तिपीठ है. यह भी पढ़ें: नवरात्री 2017: गर्भवती महिलाएं नवरात्रि व्रत में बरतें ये महत्वपूर्ण सावधानियां

वहीं, कहा जाता है कि शक्तिपीठ श्रीदेवीकूप मंदिर पर मां सती का दाया चरण गिरा था. मान्यता है कि इसी जगह पर भगवान श्रीकृष्ण का मुंडन किया गया था और मुंडन होने के बाद श्रीकृष्ण ने माता को घोड़ा भेंट किया था. तभी से यह मान्यता है कि भक्त यहां मन्नत पूरी होने पर मां को लकड़ी का घोड़ा चढ़ाते हैं. वहीं महाभारत के युद्ध के पहले पांडवों ने यहां जीत के लिए देवी की आराधना की थी. युद्ध के बाद श्रीकृष्ण ने अपने सबसे प्रिय घोड़े को इस मंदिर में छोड़ दिया था. पांडवों ने भी देवी को सोने का घोड़ा चढ़ाया था. तभी से यह मान्यता है कि भक्त यहां पर सोने का नहीं बल्कि लकड़ी का घोड़ा चढ़ाते हैं.



loading...