तेलंगाना में TRS को रोकने के लिए कांग्रेस, TDP और CPI ने बनाया महागठबंधन, 7 दिसंबर को होंगे चुनाव

2018-10-09_CongresTDPCPI.jpg

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मिजोरम और तेलंगाना में विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान हो चुका है. कांग्रेस भले ही बीएसपी, एसपी और अन्य छोटे दलों से इन हिन्दी भाषी राज्यों में गठबंधन करने में नाकामयाब रही हो, लेकिन तेलंगाना में सत्ता पाने के लिए कांग्रेस तीन अन्य पार्टियों से गठबंधन के लिए तैयार हो गई है. टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक के चंद्रशेखर राव को सत्ता से बाहर करने के लिए चार पार्टियों ने हाथ मिलाने का फैसला किया है. तेलंगाना में 7 दिसंबर को चुनाव होने हैं. कांग्रेस, एनडीए की सहयोगी रही टीडीपी, सीपीआई और हाल ही में बनी तेलंगाना जनसमिति पार्टी ने ग्रांड एलाइंस बनाने का फैसला किया है.

आपको बता दें कि तेलंगाना में समय से पहले चुनाव हो रहे हैं. मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की सरकार ने पहले ही चुनाव में जाने का फैसला किया. इसके बाद विधानसभा को भंग कर दिया गया था. सूत्रों का कहना है कि चार पार्टियों के एलाइंस का जल्द ही एलान हो सकता है. चारों पार्टियां कॉमन मिनिमम प्रोग्राम पर काम कर रही हैं. इसमें किसानों और युवाओं पर फोकस किया जा रहा है. पार्टी उन मुद्दों पर फोकस करेगी जहां केसीआर अपना वादा पूरा करने में सफल नहीं रहे हैं.

6 महीने पहले बनी पार्टी तेलंगाना जनसमिति पार्टी के अध्यक्ष इस कमेटी के हेड हैं और कॉमन मिनिमम प्रोग्राम पर काम कर रहे हैं. टीजेएस टीआरएसस के पैरलल काम कर रही है. टीजेएस के प्रमुख कोडानडरम का कहना है कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं एक सामान्य फीलिंग है कि टीआरएस के खिलाफ कोई भी अकेली पार्टी जीत हासिल नहीं कर सकती. यही कारण है कि टीआरएस को सत्ता से बेदखल करने के लिए सभी पार्टियों ने साथ आने का फैसला किया है. उन्होंने बताया कि कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के तहत दो मुद्दों पर फोकस है. लोकतंत्र की बहाली और तेलंगाना के लोगों की आकंक्षाओं को पूरा करना.

सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत अंतिम दौर में है. गठबंधन में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी होगी. अगर कांग्रेस 80 सीटें लेकर मान जाती है तो अन्य पार्टियों को कोई दिक्कत नहीं होगी. कांग्रेस टीडीपी के साथ गठबंधन चाहती है. राज्य के कुछ हिस्सों में टीडीपी की ठीक-ठाक मौजूदगी है. हालांकि टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू कांग्रेस पर हमले करते रहे हैं. 2014 के चुनाव के बाद टीडीपी और कांग्रेस के कई विधायक टीआरएस में शामिल हो चुके हैं. दोनों पार्टियों को उम्मीद है कि वे एक दूसरे को वोट ट्रांसफर कराने में सफल रहेंगी.



loading...