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सुप्रीम कोर्ट ने एक तीन दशक पुराने गैर इरादतन हत्या के प्रकरण में नवजोत सिंह सिद्धू को एक हजार के जुर्माने के साथ बरी कर दिया. आपको बता दें पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब के कैबिनेट मंत्री  सिद्धू को 3 साल जेल की सजा सुनाई थी. इसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. 

पिछले महीने इस मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस जे चेलमेश्वर और जस्टिस संजय किशन कौल की बेंच के सामने पंजाब सरकार के वकील ने कहा कि तीन साल की सजा को बरकरार रखा जाए. दलीलों के मुताबिक, मुताबिक पटियाला निवासी गुरनाम सिंह की मौत सिद्धू के मुक्का मारने के बाद हुई. ऐसा एक भी सबूत नहीं है जिससे जाहिर होता हो कि मौत का कारण हार्ट अटैक था, ब्रेन हैमरेज नहीं. ट्रायल कोर्ट ने मौत की वजह ब्रेन हैमरेज नहीं, अपितु हार्ट अटैक को बताया और सिद्धू को बरी कर दिया था. सरोन ने कहा कि हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द कर सही फैसला दिया था.

वहीं, पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखने की दलील दी थी. जस्टिस जे चेलमेश्वर और एसके कौल की बेंच ने 18 अप्रैल को इस पर फैसला रिजर्व रख लिया था. 1988 में पटियाला में रोड रेज के दौरान सिद्धू से झगड़े के बाद गुरनाम सिंह की मौत हो गई थी. इस मामले में 2006 में हाईकोर्ट से सिद्धू और एक अन्य आरोपी रुपिंदर सिंह संधू को 3 साल की सजा सुनाई थी. इसके खिलाफ सिद्धू ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. सुप्रीम कोर्ट ने 2007 में दोनों को दोषी ठहराने के फैसले पर रोक लगा दी थी, जिससे सिद्धू अमृतसर से चुनाव लड़ सके थे. हालांकि, इससे पहले 1999 में ट्रायल कोर्ट से सिद्धू समेत दोनों आरोपी बरी हो गए थे.



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