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उच्चतम न्यायालय ने बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में राज्य वित्त पोषित एक एनजीओ द्वारा संचालित एक आश्रय गृह में नाबालिग लड़कियों के कथित यौन शोषण की घटनाओं पर केन्द्र और बिहार सरकार से आज जवाब मांगा. न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की एक पीठ ने इस मामले पर स्वत: संज्ञान लिया और आश्रय गृह में कथित यौन शोषण की शिकार लड़कियों का मीडिया द्वारा बार-बार साक्षात्कार लिये जाने पर चिंता जताई.

पीठ ने बिहार सरकार और केन्द्र सरकार को नोटिस जारी किये और कथित पीड़िताओं की तस्वीरों का रूप बदलकर भी इन्हें इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर प्रसारित करने पर रोक लगाई.

न्यायालय ने मीडिया को कथित यौन शोषित पीड़िताओं का साक्षात्कार नहीं करने का निर्देश दिया और कहा कि उन्हें बार-बार अपने अपमान को दोहराने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता.

शीर्ष अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी पीड़िताओं से पूछताछ के दौरान पेशेवर काउंसिलर और योग्य बाल मनोचिकित्सकों की मदद लेगी. सीबीआई को आश्रय गृह में फॉरेंसिक जांच करने के निर्देश दिये गये हैं. मामले की अगली सुनवाई सात अगस्त को होगी.



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