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आम्रपाली समूह की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है. बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली समूह के सीएमडी अनिल शर्मा के दीपावली पर घर जाने की याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा कि अपने लेनदेन के दस्तावेज को कोर्ट में जमा करवाएं. कोर्ट ने इसी वजह से अनिल शर्मा की याचिका भी खारिज कर दी. आपको बता दें कि कोर्ट के आदेश पर आम्रपाली समूह के सीएमडी और दो अन्य निदेशक नोएडा के एक होटल में नजरबंद हैं. यही पर उनकी दिपावली भी मनेगी.

कोर्ट ने आदेश दिया है कि होटल में रहने के दौरान तीनों के पास मोबाइल नहीं होगा. इस दौरान न तो कोई उनसे मिलने आ सकेगा और न ही तीनों किसी से टेलीफोन पर बात कर सकेंगे. हालांकि, सुबह 8 से शाम 6 बजे के बीच वे मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर सकेंगे. तीनों दस्तावेजों को सूचीबद्ध करने के काम में अपने कर्मचारी व अन्य की मदद ले सकते हैं. पीठ ने दो फॉरेंसिक ऑडिटर रवि भाटिया और पवन कुमार अग्रवाल को समूह की सभी 46 कंपनियों के बैंक खाते, बैलेंस सीट समेत सभी दस्तावेजों की जांच 10 हफ्ते में पूरा करने का निर्देश दिया है.

इससे पहले आम्रपाली समूह ने पीठ को जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत नोएडा व ग्रेटर नोएडा की सात संपत्तियों तथा बिहार के दो परिसरों को सील कर दिया गया है. नोएडा व ग्रेटर नोएडा के सात परिसरों को सील करने का काम गुरुवार को पूरा कर लिया गया था.

सुनवाई के दौरान फ्लैट खरीदारों के वकील एमएल लाहौटी ने कहा कि समूह के प्रमोटर और दो निदेशकों ने अदालत के आदेश का लगातार उल्लंघन किया है. पिछले करीब एक वर्ष से समूह लगातार अदालती आदेशों की अनदेखी कर रहे हैं. वे अदालत के समक्ष गलतबयानी कर रहे हैं. तीनों को पुलिस हिरासत में रखा जाना चाहिए.

शुरुआत में पीठ तीनों को पुलिस हिरासत में रखने के पक्ष में थी. इस पर आम्रपाली के वकील आलोक अग्रवाल ने कहा कि तीनों को हिरासत में रखने के बजाय निगरानी में रखा जा सकता है. पीठ ने आग्रह स्वीकार कर तीनों को 15 दिन तक घर के बजाय पुलिस निगरानी में होटल में रखने का निर्देश दिया.

फॉरेंसिक एक्सपर्ट ने पीठ को बताया कि उनके लिए दस्तावेजों को सूचीबद्ध करना संभव नहीं है. साथ ही आरोप लगाया कि आम्रपाली समूह ने अब तक मांगे गए दस्तावेज मुहैया नहीं कराए हैं. पीठ ने कहा कि दस्तावेजों को क्रमवार सूचीबद्ध करने का काम समूह का है.



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