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अब भारी बैग से छात्रों को मिलेगा छुटकारा, मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय ने जारी किया सर्कुलर

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बस्ते के कारण बच्चों की सेहत पर होने वाले नकारात्मक प्रभाव को देखते हुए मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय ने स्कूली बैग का वजन तय कर दिया है. मंत्रालय ने इससे जुड़ा सर्कुलर सभी राज्यों को भेज दिया है और उस पर अमल करने को कहा है.

मंत्रालय द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार कक्षा 1 से 2 तक के छात्रों के लिए स्कूल बैग का वजन 1.5 किलोग्राम तक होना चाहिए. वहीं तीसरी से पांचवीं कक्षा के स्टूडेंट्स के बस्ते का वजन 2-3 किलोग्राम होगा. 6वीं और 7वीं के छात्रों के बस्ते का वजन 4 किलोग्राम से ज्यादा नहीं होना चाहिए और 8वीं-9वीं छात्रों का बस्ता 4.5 किलोग्राम का होगा. वहीं 10वीं के छात्रों के बैग का वजन 5 किलोग्राम तय किया गया है.

मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय के इस कदम से छात्रों के माता-पिता बेहद खुश हैं. उनके अनुसार भारी बस्ते के कारण बच्चों की पीठ अकड़ जाती है और वह पीठ व कंधों में दर्द की शिकायत भी करते हैं. डॉक्टरों की मानें तो भारी बस्ते के कारण बच्चों का शारीरिक विकास प्रभावित होता है.

चिल्ड्रेंस स्कूल बैग एक्ट, 2006, के अनुसार स्कूल बैग का वजन छात्र के कुल वजन का 10 प्रतिशत या इससे कम होना चाहिए. हालांकि यह पहली बार नहीं है, जब छात्रों के कंधों पर बढ़ते स्कूली बैग के बोझ पर लोगों का ध्यान गया हो. इससे पहले भी इसे लेकर कई कदम उठाए जाने की कवायद हो चुकी है.

साल 1993 में यशपाल कमेटी ने भी भारी स्कूल बैग की समस्या की पहचान की थी और पाठ्य पुस्तकों को स्कूल की संपत्ति के रूप में माने जाने की सिफारिश की थी. कमेटी ने अपनी सिफारिश में कहा था कि छात्रों की भारी किताबें स्कूलों में रहनी चाहिए. छात्रों को स्कूल में एक लॉकर मिलना चाहिए, जिसमें वह अपनी किताबें रख सकें.

यशपाल कमेटी ने यह भी सुझाव दिया था कि होमवर्क और क्लासवर्क के लिए अलग समय सारिणी बनाई जानी चाहिए, ताकि उन्हें रोजाना किताबें घर ले जाने की जरूरत ना पड़े.



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