जानिए- कैसे हुआ गणेश जी का जन्म, क्या कहती है पुराणों में लिखी कथाएं

2018-09-12_LordGanesh.jpg

भगवान गणेश के जन्म और सिर कटने के बारे में पुराणों में अलग-अलग बातें बताई गई हैं, लेकिन शिवपुराण के अनुसार माता पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से गणेश जी को जन्म दिया. इसके अलावा उनके सिर कटने की कथा भी शिव पुराण में अलग और ब्रह्मवैवर्त पुराण में अलग है. शिवपुरण के अनुसार भगवान शिव ने क्रोध में आकर गणेश जी का सिर काट दिया था, वहीं ब्रह्मवैवर्त पुराण में बताया गया है कि शनि की टेढ़ी नजर गणेश जी के सिर पर पड़ने से उनका सिर कट गया था. जानिए उनकी कथाएं- 

शिव पुराण के अनुसार- देवी पार्वती ने एक बार शिवजी के गण नन्दी के द्वारा उनकी आज्ञा पालन में त्रुटि के कारण अपने शरीर के उबटन से एक बालक का निर्माण कर उसमें प्राण डाल दिए और कहा कि तुम मेरे पुत्र हो. तुम मेरी ही आज्ञा का पालन करना और किसी की नहीं. देवी पार्वती ने यह भी कहा कि मैं स्नान के लिए जा रही हूं. कोई भी अंदर न आने पाए. थोड़ी देर बाद वहां भगवान शंकर आए और देवी पार्वती के भवन में जाने लगे. 

यह देखकर उस बालक ने उन्हें रोकने का प्रयास किया. बालक का हठ देखकर भगवान शंकर क्रोधित हो गए और उन्होंने अपने त्रिशूल से उस बालक का सिर काट दिया. देवी पार्वती ने जब यह देखा तो वे बहुत क्रोधित हो गईं. उनकी क्रोध की अग्नि से सृष्टि में हाहाकार मच गया. तब सभी देवताओं ने मिलकर उनकी स्तुति की और बालक को पुनर्जीवित करने के लिए कहा. तब भगवान शंकर के कहने पर विष्णुजी एक हाथी का सिर काटकर लाए और वह सिर उन्होंने उस बालक के धड़ पर रखकर उसे जीवित कर दिया. तब भगवान शंकर व अन्य देवताओं ने उस गजमुख बालक को अनेक आशीर्वाद दिए. देवताओं ने गणेश, गणपति, विनायक, विघ्नहर्ता, प्रथम पूज्य आदि कई नामों से उस बालक की स्तुति की. इस प्रकार भगवान गणेश का प्राकट्य हुआ.

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार-  गणेशजी के जन्म के बाद जब सभी देवी-देवता उनके दर्शन के लिए कैलाश पहुंचे. तब शनिदेव भी वहां पहुंचे, लेकिन उन्होंने बालक गणेश की ओर देखा तक नहीं. माता पार्वती ने इसका कारण पूछा तो शनिदेव ने बताया कि मुझे मेरी पत्नी ने श्राप दिया है कि मैं जिस पर भी दृष्टि डालूंगा, उसका अनिष्ट हो जाएगा. इसलिए मैं इस बालक की ओर नहीं देख रहा हूं. तब माता पार्वती ने शनिदेव से कहा कि यह संपूर्ण सृष्टि तो ईश्वर के अधीन है. बिना उनकी इच्छा से कुछ नहीं होता. अत: तुम भयमुक्त होकर मेरे बालक को देखो और आशीर्वाद दो. माता पार्वती के कहने पर जैसे ही शनिदेव ने बालक गणेश को देखा तो उसी समय उस बालक का सिर धड़ से अलग हो गया. बालक गणेश की यह अवस्था देखकर माता पार्वती विलाप करने लगी. माता पार्वती की यह अवस्था देखकर भगवान विष्णु ने एक हाथी के बच्चे का सिर लाकर बालक गणेश के धड़ से जोड़ दिया और उसे पुनर्जीवित कर दिया.



loading...