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राज कुमार गुप्ता : छोटी पहल, बदलाव बड़े

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माना जाता है जब जागो तभी सवेरा. हालाँकि कभी-कभी सवेरा लेट भी हो जाता है. लेट हो पर हो ज़रूर. 25 दिसंबर को इंदौर में एक पहल की है. ऐसा करने पर इंदौर ने पहले राज्य का स्थान भी पा लिया है. ‘यदि सार्वजनिक स्थान पर थूका तो जुर्माना वसूला जाएगा.’ पूरे हिंदुस्तान में से उत्तर मध्य भारत में जहाँ-तहां थूकने की प्रवृति कुछ ज़्यादा ही है. इसके अलावा पान-गुटके के निशान भी आपको सभी जगह मिल ही जायेंगे. सार्वजनिक स्थानों पर थूकने की आदत बुराई की श्रेणी में आती है, यह सभी जानते, समझते और मानते भी हैं, लेकिन मसला जैसे ही सुधार के संकल्प तक आता है, लोग समस्याएं बुनने-बताने लग जाते हैं.

राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण की बातों पर अगर ध्यान दें तो विगत होगा कि देश के 11 राज्यों में तंबाकू का उपयोग अधिक होता है. सबसे ज्यादा मिजोरम, यहां 80 प्रतिशत लोगों को तंबाकू की आदत है. जबकि, मध्य प्रदेश में 60 व छत्तीसगढ़ में 55 प्रतिशत इसके शिकार हैं. 

आप सोच रहे होंगे ये मसला अब संज्ञान में क्यूँ आया है. दरसल मामला 2016 में ही पहली बार संज्ञान में आया जब राज्यसभा में प्रश्नकाल के बीच तृणमूल कांग्रेस के सांसद नदीमुल हक ने कहा- भारत एक थूकने वाला देश (स्पिटिंग कंट्री) है. हम जब बोर होते हैं- तो थूकते हैं. थके या गुस्से में होते हैं- तो थूकते हैं. कई बार, कुछ नहीं कर रहे होते हैं- तब भी थूकते रहते हैं. स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने गंभीरता समझी और सदन में जवाब दिया- सरकार कानून बनाने पर विचार करेगी. यदि इंदौर खुद पहल कर रहा है तो यह स्वागत योग्य है.

2016-17 में बृहन्मुंबई महानगर पालिका ने क्लीन अप मार्शल रखकर इस विषय पर कार्रवाई शुरू की तो 93 हजार केस बने और लगभग नौ करोड़ रुपए का जुर्माना वसूला गया. आप खुद सोचिये ये तो सिर्फ एक ही एक शहर का  आंकड़ा है तो देश की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है. 

थूकने से सिर्फ हमारा देश ही गन्दा नहीं होता बल्कि इससे हमारे संस्कार भी जाहिर होते हैं. हमारे देश में धरती को माँ का दर्जा देते हैं और अपनी माँ पर ही थूक देते हैं. ये पूर्णत: गलत है. इस तरह की हरकतें वाकई में गलत हैं. अक्सर हम लोग अपनी सभ्यता को छोड़कर पश्चिमी सभ्यता को अपनाने में ज़्यादा लालायित रहते हैं. पर क्या आप जानते हैं सिंगापुर में लोग सड़कों पर थूकते ही नहीं. यहाँ तक कि उन्होंने जुर्माने के डर से पान या अन्य कोई भी पदार्थ खाना ही छोड़ कर दिया है. चाहे जुर्माने के डर हो परन्तु वहां स्पिटिंग बंद हो गयी है. इसके बनिस्पत हिंदुस्तान में आप कहीं भी चाहे दीवार हो, सड़क हो, कोई भी सार्वजनिक जगह हो वहां आसानी से थूक सकते हैं. लेकिन अब इंदौर ने सभी को चेताना शुरू कर दिया है. असल मायनों में अगर सभी नागरिक देश को अपना समझेंगे तभी उसके लिए चेत होंगे. देश भी हमारे अपनों जैसा होता है. इसका भी हमें ही ध्यान रखना होगा.

इंदौर से चला ये अभियान जल्द ही पूरे हिन्दुस्तान में चलना चाहिए. जिससे देश तो स्वच्छ होगा ही. हमारी आंतरिक सोच भी साफ़ हो जायेगी. वो दिन दूर नहीं जब इंदौर की यह पहल देश में एक बड़े बदलाव की क्रांति लाएगी. तब कोई नहीं कहेगा – ‘India is a SPITING Country.’



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