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गणेशोत्सव के मौक़े पर जाने सिद्धिविनायक मंदिर की ख़ास बातें

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पूरे देश में गणेशोत्सव के त्योहार की धूम है. हिन्दू धर्म की मान्यता के मुताबिक भगवान गणेश हिंदुओं के प्रथम देव हैं. किसी भी काम को करने से पहले उनकी पूजा की जाती हैं. गणेशोत्सव वैसे तो पूरे देश में बड़े उत्साह और प्रसन्नता से मनाया जाता है, लेकिन महाराष्ट्र में इसकी खास रौनक देखने मिलती है. जगह-जगह पंडालों में भक्त अपने लाड़ले गणपति बप्पा को स्थापित करते हैं. 10 दिनों तक भक्त उनके भक्ति में लीन होते हैं.

ऐसा भी माना जाता है कि महाराष्ट्र के 8 स्थानों में भगवान गणेश स्वयं विराजमान हैं. गणेश की स्वयंभू प्रतिमा के कारण इन्हें अष्टविनायक कहा जाता है. गणेशोत्सव के दौरान इन मंदिरों में भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ता है. अष्टविनायक के 8 स्वरूपों में से एक है सिद्धटेक का सिद्धिविनायक मंदिर.

यह मुंबई का प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर नहीं है दरअसल ये अहमदनगर जिले के कर्जत तहसील में स्थित है. ऐसा माना जाता है कि यही पर भगवान विष्णु ने सिद्धियां प्राप्त की थी. यह मंदिर एक पहाड़ की चोटी पर बना हुआ है जिसका मुख्य द्वार उत्तर दिशा की ओर है. मंदिर तक पहुंचने के लिए पहाड़ी की यात्रा करने पड़ती है.

सिद्धिविनायक मंदिर में गणेशजी की मूर्ति 3 फीट ऊंची और ढाई फीट चौड़ी है. वैसे तो इस मंदिर में पूरे साल भक्त बप्पा का आशीर्वाद लेने आते है मगर गणेशोत्सव के दौरान इसका महत्त्व और भी बढ़ जाता है.

यह मंदिर पुणे से करीब 200 किलोमीटर दूर है. अगर किसी भी भक्त को इस मंदिर में जाकर बप्पा के दर्शन करने है तो वह दौंड स्टेशन से भी जा सकते है. पुणे और मुंबई से इस मंदिर में पहुंचने के लिए बसें भी चलती हैं.



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