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 मुस्लिम से शादी करने पर मंदिर सोसाइटी ने एक हिंदू महिला का श्राद्ध कराने से इनकार कर दिया। पिछले हफ्ते पत्नी की बीमारी से मौत के बाद पति ने हिंदू रीति-रिवाज से उसका अंतिम संस्कार किया था। इसके बाद काली मंदिर सोसाइटी में श्राद्ध के लिए बुकिंग कराई थी। लेकिन जब पंडित ने महिला के गौत्र के बारे में पूछा तो वह कुछ बता नहीं पाया। पति के मुस्लिम होने की जानकारी मिलने पर बुकिंग रद्द कर दी गई।

बंगाली बहुल चितरंजन पार्क स्थित काली मंदिर सोसाइटी के पदाधिकारियों का तर्क है कि भले ही महिला हिंदू हो, लेकिन मुस्लिम से शादी करने के बाद वह हिंदू नहीं रही। महिला का नाम निवेदिता घटक था। उसने 20 साल पहले स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत कोलकाता के इम्तियाजुर रहमान से शादी की थी। इसके चलते निवेदिता को अपना धर्म नहीं बदलना पड़ा। मंदिर सोसाइटी के अध्यक्ष अशितावा भौमिक ने बताया कि रहमान ने पहचान छिपाकर बेटी अम्बरीन के नाम पर बुकिंग कराई थी। जिसका नाम अरबी या मुस्लिमों जैसा नहीं था। महिला का गौत्र पूछने पर उनके मुस्लिम होने का पता चला।

रहमान ने कहा कि मजहब उनका निजी मामला है, इसके लिए कभी पत्नी से रिश्ते खराब नहीं हुए। निवेदिता चाहती थीं कि उनके निधन के बाद हिंदू धर्म के हिसाब से श्राद्ध कराया जाए। उनकी अंतिम इच्छा को लेकर मंदिर सोसाइटी की अध्यक्ष से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि श्राद्ध करना ही है तो दिल्ली में क्यों, कोलकाता जाकर करें।



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