हनुमान जी के 7 चमत्कारी मंद‌िर, जहां भक्तों की होती हैं मुरादें पूरी

रामभक्त हनुमान के विश्व में बहुत से मंदिर हैं। उनके कुछ ऐसे भी मंदिर है जहां व्यक्ति की प्रत्येक इच्छाएं पूर्ण होती हैं। ये तीर्थ श्रीराम की नगरी अयोध्या से लेकर विन्ध्याचल पर्वत तक फैले हैं। माना जाता है कि इन हनुमान मंदिरों में भगवान श्रीराम का नाम लेकर मन्नत मांगने पर मन्नत अवश्य पूर्ण होती है। आइए जानें कुछ हनुमान मंदिरों के बारे में-

हनुमानगढ़ी, अयोध्या (Hanuman Garhi,Ayodhya) : अयोध्या के राजा भगवान राम हैं परंतु यहां का सबसे प्रमुख श्री हनुमान मंदिर हनुमानगढ़ी के नाम से प्रसिद्ध है। यहां पर हनुमानजी हनुमानगढ़ी में विराजमान हैं। उनके दर्शन करने के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं। कहा जाता है कि जब इस मंदिर में हनुमान जी की आरती होती है तो उस समय मन्नत मांगने पर पूर्ण हो जाती है। कहा जाता है कि लंका विजय के पश्चात हनुमानजी पुष्पक विमान में श्रीराम सीता और लक्ष्मण जी के साथ इस स्थान पर आए थे और तभी से वो हनुमानगढ़ी में विराजमान हो गए। ये भी कहा जाता है कि जब भगवान राम परमधाम जाने लगे तो उन्होंने अयोध्या का राज-काज हनुमान जी को ही सौंपा और तभी से हनुमान जी ने ये कार्य संभाला हुआ है। 


पंचमुखी हनुमान मंदिर कानपुर ( Panki hanuman Mandir Kanpur) : कानपुर के पंचमुखी हनुमान जी का मंदिर स्थित है। इसी स्थान पर हनुमान और लवकुश का युद्ध हुआ था। युद्ध में परास्त होने के पश्चात माता सीता ने हनुमान जी को भोजन करवाया था। माता सीता ने हनुमान जी को लड्डु खिलाए थे इसलिए उन्हें  लड्डुओं का ही भोग लगाया जाता है। इस मंदिर में लाडू चढ़ाने से सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है। 

हनुमान मंदिर, इलाहबाद, उत्तर प्रदेश (Hanuman Temple, Allahabad, Uttar Pradesh) : इलाहबाद किले से सटा यह मंदिर लेटे हुए हनुमान जी की प्रतिमा वाला एक छोटा किन्तु प्राचीन मंदिर है। यह सम्पूर्ण भारत का केवल एकमात्र मंदिर है जिसमें हनुमान जी लेटी हुई मुद्रा में हैं। यहां पर स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा 20 फीट लम्बी है। जब वर्षा के दिनों में बाढ़ आती है और यह सारा स्थान जलमग्न हो जाता है, तब हनुमानजी की इस मूर्ति को कहीं ओर ले जाकर सुरक्षित रखा जाता है। उपयुक्त समय आने पर इस प्रतिमा को पुन: यहीं लाया जाता है।

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर, मेहंदीपुर, राजस्थान (Mehandipur Balaji Temple, Mehandipur, Rajasthan) : राजस्थान के दौसा जिले के पास दो पहाडिय़ों के बीच बसा हुआ मेहंदीपुर नामक स्थान है। यह मंदिर जयपुर-बांदीकुई-बस मार्ग पर जयपुर से लगभग 65 किलोमीटर दूर है। दो पहाडिय़ों के बीच की घाटी में स्थित होने के कारण इसे घाटा मेहंदीपुर भी कहते हैं। जनश्रुति है कि यह मंदिर करीब 1 हजार साल पुराना है। यहां पर एक बहुत विशाल चट्टान में हनुमान जी की आकृति स्वयं ही उभर आई थी। इसे ही श्री हनुमान जी का स्वरूप माना जाता है। इनके चरणों में छोटी सी कुण्डी है, जिसका जल कभी समाप्त नहीं होता। यह मंदिर तथा यहाँ के हनुमान जी का विग्रह काफी शक्तिशाली एवं चमत्कारिक माना जाता है तथा इसी वजह से यह स्थान न केवल राजस्थान में बल्कि पूरे देश में विख्यात है। कहा जाता है कि मुगल साम्राज्य में इस मंदिर को तोडऩे के अनेक प्रयास हुए परंतु चमत्कारी रूप से यह मंदिर को कोई नुकसान नहीं हुआ। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहां ऊपरी बाधाओं के निवारण के लिए आने वालों का तांता लगा रहता है। मंदिर की सीमा में प्रवेश करते ही ऊपरी हवा से पीडि़त व्यक्ति स्वयं ही झूमने लगते हैं और लोहे की सांकलों से स्वयं को ही मारने लगते हैं। मार से तंग आकर भूत प्रेतादि स्वत: ही बालाजी के चरणों में आत्मसमर्पण कर देते हैं।

श्री संकटमोचन मंदिर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश (Shri Sankat Mochan Hanuman Mandir, Varanasi, Uttar Pradesh) : यह मंदिर उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में स्थित है। इस मंदिर के चारों ओर एक छोटा सा वन है। यहां का वातावरण एकांत, शांत एवं उपासकों के लिए दिव्य साधना स्थली के योग्य है। मंदिर के प्रांगण में श्रीहनुमानजी की दिव्य प्रतिमा स्थापित है। श्री संकटमोचन हनुमान मंदिर के समीप ही भगवान श्रीनृसिंह का मंदिर भी स्थापित है। ऐसी मान्यता है कि हनुमानजी की यह मूर्ति गोस्वामी तुलसीदासजी के तप एवं पुण्य से प्रकट हुई स्वयंभू मूर्ति है। इस मूर्ति में हनुमानजी दाएं हाथ में भक्तों को अभयदान कर रहे हैं एवं बायां हाथ उनके ह्रदय पर स्थित है। प्रत्येक कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को हनुमानजी की सूर्योदय के समय विशेष आरती एवं पूजन समारोह होता है। उसी प्रकार चैत्र पूर्णिमा के दिन यहां श्रीहनुमान जयंती महोत्सव होता है। इस अवसर पर श्रीहनुमानजी की बैठक की झांकी होती है और चार दिन तक रामायण सम्मेलन महोत्सव एवं संगीत सम्मेलन होता है।

सालासर बालाजी हनुमान मंदिर, सालासर, राजस्थान (Salasar Balaji Hanuman Mandir, Salasar, Rajasthan) : हनुमानजी का यह मंदिर राजस्थान के चूरू जिले में है। गांव का नाम सालासर है, इसलिए सालासर वाले बालाजी के नाम यह मंदिर प्रसिद्ध है। हनुमानजी की यह प्रतिमा दाड़ी व मूंछ से सुशोभित है। यह मंदिर पर्याप्त बड़ा है। चारों ओर यात्रियों के ठहरने के लिए धर्मशालाएं बनी हुई हैं। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं और मनचाहा वरदान पाते हैं। इस मंदिर के संस्थापक श्री मोहनदासजी बचपन से श्री हनुमान जी के प्रति अगाध श्रद्धा रखते थे। माना जाता है कि हनुमान जी की यह प्रतिमा एक किसान को जमीन जोतते समय मिली थी, जिसे सालासर में सोने के सिंहासन पर स्थापित किया गया है। यहाँ हर साल भाद्रपद, आश्विन, चैत्र एवं वैशाख की पूर्णिमा के दिन विशाल मेला लगता है।

हनुमान धारा, चित्रकूट, उत्तर प्रदेश  (Hanuman Dhara, Chitrakoot, Uttar Pradesh) : उत्तर प्रदेश के सीतापुर नामक स्थान के समीप यह हनुमान मंदिर स्थापित है। सीतापुर से हनुमान धारा की दूरी तीन मील है। यह स्थान पर्वतमाला के मध्यभाग में स्थित है। पहाड़ के सहारे हनुमानजी की एक विशाल मूर्ति के ठीक सिर पर दो जल के कुंड हैं, जो हमेशा जल से भरे रहते हैं और उनमें से निरंतर पानी बहता रहता है। इस धारा का जल हनुमानजी को स्पर्श करता हुआ बहता है। इसीलिए इसे हनुमान धारा कहते हैं। धारा का जल पहाड़ में ही विलीन हो जाता है। उसे लोग प्रभाती नदी या पातालगंगा कहते हैं। इस स्थान के बारे में एक कथा इस प्रकार प्रसिद्ध है- श्रीराम के अयोध्या में राज्याभिषेक होने के बाद एक दिन हनुमानजी ने भगवान श्रीरामचंद्र से कहा- हे भगवन। मुझे कोई ऐसा स्थान बतलाइए, जहां लंका दहन से उत्पन्न मेरे शरीर का ताप मिट सके। तब भगवान श्रीराम ने हनुमानजी को यह स्थान बताया।



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