सरकार ने कहा- रेस्टोरेंट बिल में लगने वाला सर्विस चार्ज देना जरूरी नहीं

2017-01-02_534656-restaurant.jpg

केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने आज स्पष्ट किया कि कोई भी कंपनी, होटल या रेस्ट्रॉन्ट ग्राहकों से जबर्दस्ती सर्विस चार्ज नहीं वसूल सकता। यानी अब आप किसी रेस्टोरेंट या होटल के बिल में आने वाला सर्विस चार्ज देना चाहते हैं या नहीं, ये आप पर ही निर्भर करता है। मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों से कहा है कि वह अपने राज्य की कंपनियों, होटलों और रेस्टोरेंट्स को इस बारे में आगाह कर दें। ये स्पष्ट हो गया है कि इस तरह के बिल में जोड़े गए टैक्स में सर्विस चार्ज लगाया गया हो तो उसे चुकाना अब वैकल्पिक होगा।

बता दें कि विभिन्न टैक्स के अलावा बिल में सर्विस चार्ज जुड़ा हो तो इसका भुगतान पहले से ही वैकल्पिक था। लेकिन होटलों और रेस्टोरेंट्स ने इसे वैकल्पिक की जगह जरूरी बना दिया था। इसकी वजह से ग्राहक मजबूर होकर सर्विस चार्ज दे रहे थे। मंत्रालय को इनसे जुड़ी शिकायतें मिलीं तो उसने स्पष्टीकरण जारी किया। स्पष्टीकरण के अनुसार, उपभोक्ता को लगे कि उसे मिली सेवा से वह पूर्णतः संतुष्ट है तो वह सर्विस चार्ज दे, वरना वह सर्विस चार्ज के रूप में एक रुपया भी नहीं देगा। यहां सर्विस प्रोवाइडर उपभोक्ता पर सर्विस चार्ज पे करने का दबाव नहीं डाल सकता।

मंत्रालय की विज्ञप्ति में साफ शब्दों में कहा गया है, ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (कन्ज्यूमर प्रोटेक्शन ऐक्ट), 1986 में कहा गया है कि बिक्री, इस्तेमाल या किसी सामान की आपूर्ति अथवा किसी सेवा के लिए किसी अनुचित तरीका अपनाने या धोखा देने को गलत धंधा (अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस) माना जाएगा। ऐसे में उपभोक्ता इस अधिनियम के अंतर्गत स्थापित उचित फोरम में ऐसे गलत धंधे के खिलाफ शिकायत दर्ज करवा सकता है।’

मंत्रालय के नए निर्देशों के मुताबिक अब होटल और रेस्टोरेंट मालिकों को सही जगह पर ये जानकारी लगानी भी होगी कि सर्विस चार्ज का भुगतान पूरी तरह ग्राहक की मर्जी पर निर्भर करता है, इसमें कोई जोर-जबर्दस्ती नहीं हो सकती। ज़ाहिर है, सरकार के इन नए निर्देशों और स्पष्टीकरण से आम लोगों को काफी राहत मिलेगी। वहीं होटल और रेस्टोरेंट मालिकों की मनमानी पर नियंत्रण होगा।



loading...