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आइकोनिक फेस-2017 की शाम रही शानदार, राज महाजन ने दिया बडिंग टैलेंट को प्लेटफार्म

खूबसुरती भरे पलों के बीच में बीती आइकोनिक फेस -2017 की शाम. दिल्लीके ग्रैंड पाम में Jollywood और Eventize Media ने टैलेंट को मंच देने के लिए इस शाम का आयोजन किया. जहाँ मौजूद रहींफिल्म, इवेंट, फैशन और मीडिया जगत की कई जानी-मानी हस्तियाँ. इस शो को बनाने वाले अरविन्द पराशर

पति से अलग होने पर खूब रोईं मोनालिसा, शादी के दो दिन बाद ही घर से चले गए विक्रांत

दो दिन पहले ही शादी हुई थी और नए-नवेली दुलहन मोनालिसा फूट-फूटकर रोने लगी. वजह थी उनके पति विक्रांत का घर से चले जाना. दरअसल बिग बॉस के घर में ही कंटेस्टेंथट मोनालिसा की शादी उनके ब्वॉयफ्रेंड विक्रांत सिंह के साथ हो गई. शादी में शामिल होने के लिए कई सेलेब्रिटीज के साथ मोना की मां और बहन भी पहुंची

तो क्या फिनाले में नहीं होंगे सलमान खान, स्वामी ओम की वजह से करेंगे शो का बहिष्कार

अब शो में नहीं होंगे सलमान खान. कर सकते हैं फिनाले का बहिष्कार. इसकी सबसे बड़ी वजह है स्वामी ओम. स्वामी ओम बिग बॉस के फाइनल में शिरकत करेंगे, जबकि सलमान ने शो के मेकर्स को पहले ही चेतावनी दे दी थी कि प्रियंका जग्गा और स्वामी ओम में से कोई भी बिग बॉस के ग्रेंड फिनाले में नहीं दिखना चाहिए. लेकिन शो


OMG!!! सलमान खान हैं HIV+ स्वामी ओम ने किया खुलासा, इसिलए नहीं कर रहे हैं शादी

बिग बॉस से बाहर जाने के बाद स्वामी ओम लगता है पागल हो गए हैं. अंदर रहते हुए भी उन्होंने अपनी गन्दी हरकतों से घरवालों को परेशान कर रखा था और अब बाहर आने के बाद भी सुधरे नहीं हैं. बिग बॉस से निकाले जा चुके स्वामी ओम सलमान खान पर हमला करना बंद नहीं कर रहे. इस बार उन्होंने एक इंटरव्यू में सलमान को एड

टूट गया मोनालिसा-विक्रांत का रिश्ता, मनु पंजाबी से बढ़ा रही थी नजदीकियां

बिग बॉस की वजह से टूट गया है मोनालिसा और विक्रांत का रिश्ता. आप्कोब्ता दें पीछे कई दिनों से मोनालिसा घर में कुछ ज्यादा से रोमांस कर रही थी. कभी मनु के साथ तो कभी गौरव के साथ. उनकी इस करनी का फल उन्हें मिल गया है. उनके मंगेतर ने तंग आकर रिश्ता तोड़ दिया है. कुछ वक्त पहले खबरें आईं थ

स्वामी ओम चाहते हैं आमिर, सैफ, शाहरुख़ को हिन्दू बनाना, कहा- अगले वैलेंटाइन डे तक नहीं बने तो किडनैप कर लूँगा

स्वामी ओम ने बीड़ा उठाया है इंडस्ट्री के तीन खान यानि सैफ, आमिर, और शाहरुख़ को हिन्दू बनाने का. वैसे तो बिग बॉस के घर में स्वामी बाबा धमाल मचाते ही रहते हैं अब खुले तौर पर वो धमकी भी देने लगे है. दरअसल, उन्होंने सैफ अली खान, शाहरुख खान और आमिर खान को धमकी दी है. धमकी देते हुए स्वामी ओम का


Shocking!!! बिग बॉस के घर में मनु-मोनालिसा चला रहे हैं ‘किसिंग क्लास’, सबक सिखाने के लिए जानें कौन आने वाला है

ओह माय गॉड!!! ये बिग बॉस के घर में क्या हो रहा है. घर न होकर कोई रोमांस का स्कूल बना गया है जहाँ मनु और मोनालिसा ही स्टूडेंट हैं. सभी ने देखा है कि बिग बॉस के घर में शुरुआत से ही मोनालिसा और मनु पंजाबी एक दूसरे के करीब आने लगे लेकिन तब किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि बात इतनी बढ़ जाएगी कि ये अपन

सलमान खान के शो बिग बॉस में नहीं जायेंगे आमिर खान, बिग बॉस के सेट पर नहीं होगी ‘दंगल’ प्रमोट

आमिर फिल्म के प्रचार-प्रसार के मामले में अलग राह अपनाते हैं. आमिर टीवी पर जाकर अपनी फिल्म का प्रचार करना पसंद नहीं करते. आमिर से जुड़े लोगों का कहना है कि आमिर का मानना है कि टीवी के जरिये लोगों को सिर्फ इतना पता चलता है कि फिल्म कब प्रदर्शित हो रही है. लोगों को फिल्म देखने के लिए

इन लोगो की वाइल्ड कार्ड एंट्री हो सकती है Bigg Boss Season 10 में

बिग बॉस सीजन 10 में जल्द ही कई वाइल्ड कार्ड एंट्री होने वाली हैं। एमटीवी रोडीज कंटेस्टेंट साहिल आनंद, मॉडल एलिना कजन, सीजन की सबसे पहले एविक्शन में बाहर हुईं प्रियंका जग्गा के अलावा मॉडल जेसन शाह का नाम भी इस लिस्ट में सामने आ रहा है। हालांकि इन चारों में सबसे ज्यादा चर्चा जेसन की हो रह


big boss 10: वाइल्ड कार्ड एंट्री के ज़रिये दस्तक देंगी अपर्णा तिलक, राहुल देव की एक्स गर्लफ्रेंड हैं

इस बार बिग बॉस 10 में आम लोगों को भी सेलेब्रिटी के साथ घर में रखा गया है. कॉमन लोग और सेलेब्रिटी के बीच होने वाली नोक-झोक लोगों को पसंद भी आ रही है. सलमान खान ने खुद कहा था की इस साल सेलेब्रिटी बोरिंग हैं मगर शो में आये कौमनर्स काफी इंट्रेस्टिंग है. शायद इसी वजह से प्रोडूसर शो में सेलेब

BIGG BOSS 10 में टास्क के दौरान गौरव-बानी आये नज़दीक, बाथटब में हुआ ‘चुम्मा-चुम्मा’

बिग बॉस के घर में इस हफ्ते खूब धमाल देखने को मिला जब एक्ट्रेस सनी लियोनी घर के सदस्यों से मिलने पहुंचीं. यहां सनी लियोन ने नॉमिनेशन की प्रक्रिया को संभाला और घर के सभी सदस्यों को टास्क भी करने को दिए और ऐसे ही एक टास्क के दौरान बानी और गौरव के बीच कुछ ऐसा हुआ जिससे खुद सनी लियोन भी शॉक में आ गयी.


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  • ‘स्कूल’ हैं सबसे ज़्यादा असुरक्षित – राज महाजन

    ‘स्कूल’ हैं सबसे ज़्यादा असुरक्षित – राज महाजन

    8 सितम्बर को हुआ इंसानियत को शर्मशार करने वाला  काण्ड. एक बच्चा रोज की तरह अपने स्कूल जाता है. लेकिन उस दिन वह घर वापिस नहीं आता. अपने पीछे छोड़ गया वो खिलखिलाती सी मुस्कान, मीठी बातें और कई ‘अनसुलझे सवाल’. गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ने वाले प्रद्युम्न का मर्डर क्या सच में बस कंडक्टर अशोक ने किया है? कैसे कंडक्टर स्कूल में चाकू लेकर दाखिल हो जाता है? क्यूँ उसने प्रद्युम्न को ही अपना शिकार बनाया? क्या प्रद्युम्न ने स्कूल में कुछ ऐसा देखा था कि जिसकी वजह से उसे मौत के घाट उतार दिया गया?

    सिर्फ एक प्रद्युम्न के साथ ही ऐसा नहीं हुआ है. पिछले कुछ दिनों में यह फेहरिस्त काफी लम्बी हो गयी है. बेंगलुरु में भी स्कूल के ही चपरासी ने चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया. घटना का ख़ुलासा तब हुआ जब बच्ची ने प्राइवेट पार्ट में दर्द की शिकायत घरवालों से की. ऐसी ही एक घिनौनी हरकत देखने को मिली दिल्ली के गांधीनगर के पब्लिक स्कूल में. टैगोर पब्लिक स्कूल के गार्ड ने पांच साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया. गार्ड ने क्लासरूम में ले जाकर बच्ची को पहले मारने की धमकी दी और फिर उससे दुष्कर्म किया. इसके अलावा नई दिल्ली के वसंतकुंज में छह साल के एक बच्चे की वाटर टैंक में डूबकर मौत हो गई। इससे पहले गाजियाबाद के प्राइवेट स्कूल में एक बच्चा रहस्यमय मौत का शिकार हो चुका है।

    ऐसी घटनाओं के बाहर आने से इंसानियत तो शर्मशार हुई है. साथ ही इन सभी वारदातों से ये बात भी सामने आई है कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा किसके जिम्मे है? अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं, इसी भरोसे के साथ कि घर के बाहर बच्चा स्कूल में सुरक्षित रहेगा. लेकिन उनके नौनिहालों के साथ इस तरह का कुकृत्य घट जाता है. इसकी जवाबदेही किसकी है?

  • पुलिस द्वारा अपने जुर्म को छिपाने की कोशिश- राज महाजन

    पुलिस द्वारा अपने जुर्म को छिपाने की कोशिश- राज महाजन

    क़ानून का काम होता है समाज की रक्षा करना और गुनह्गारों को सजा दिलाना. लेकिन आजकल के परिपेक्ष्य में क़ानून निर्दोष और मासूमों पर जुल्म करता दिख रहा है. जरा सोचिये अगर रक्षक ही भक्षक बन जाए तो फिर समाज का क्या होगा? इस तरह से समाज गर्त में चला जायेगा.

    हाल ही में हुआ मंगलापुरी का संस्करण इसी बात की गवाही देता है कि पुलिस बन गयी है भक्षक. इस मामले में पुलिस एक महिला पत्रकार को जानवरों की तरह मारती है, उसका शोषण करती है, उसे मानसिक रूप से परेशान करती है. इतना ही नहीं अपनी दबंगई दिखाने के चक्कर में पुलिस उसको झूठे आरोपों के तहत फंसाने का प्रयास भी करती है.

    यह घटना घटी है न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार प्रीती सुन्द्रियाल के साथ. DDA मंगलापुरी में अवैध रूप से रह रहे लोगों को उनकी झुग्गियों समेत वहां से हटाने गई थी. साथ में सरकारी काम सुचारू रूप से चले इसके लिए पुलिस भी तैनात थी. हालाँकि उस जमीन पर कोर्ट का स्टे ऑर्डर होने के बावजूद भी DDA वहां पहुँच जाता है. स्टे ऑर्डर के मुताबिक, नवम्बर तक लोगों को वहां से हटाया नहीं जा सकता.

    DDA ने अपना काम करना शुरू कर दिया और पुलिस वालों ने अपना. यहाँ न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार घटना स्थल पर पहुंचकर अपना काम ही कर रही थी कि उसे पुलिस के जुर्म का शिकार होना पड़ा. पुलिस ने प्रीती पर डंडे बरसाए, लाते-घुसे बरसाए. यहाँ तक कि उसे चांटे भी मारे गये. एक महिला होने के बाद उस बुरी तरह से अपमानित किया गया बिना किसी अपराध के.

    इसके बाद शुरू हुआ पुलिस का असली खेल. घटना स्थल पर किसी उपद्रवी ने आग लगा दी जिससे लोग बेकाबू हो गये. इसका ठीकरा भी पुलिस वालों ने प्रीती के सर फोड़ा. पुलिस ने इसी बात का फयेदा उठाकर इस पूरे प्रकरण का इलज़ाम न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार पर लगा दिया. उसके बाद उसे देशद्रोह और दंगा फ़ैलाने के आरोप में फंसाने के लिए पुलिस ने चालें चलनी शुरू कर दी.

    मारपिटाई के बाद महिला पत्रकार को पुलिस जबरन घसीटकर थाने ले जाती है और अपने जुर्म को छुपाने के लिए उससे एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराती है. यह हस्ताक्षर भी जबरन कराये जाते हैं यहाँ तक कि पत्रकार को पढ़ने तक नहीं दिया जाता. जाहिर सी बात है उन कागजों में कुछ तो ऐसा जरूर था जो पुलिस ने उसे पढ़ने नहीं दिया.

    इस पूरे प्रकरण में पुलिस का जो चेहरा सामने आया काफी भयानक और निंदनीय है. जिसे हमारी रक्षा का दायित्व सौंपा है वही हम पर प्रहार करे तो अंजाम अंत ही होगा.

    मैं इसकी घोर निंदा करता हूँ और चाहता हूँ कि पुलिस इस मामले पर अपनी जिम्मेदारी समझते हुए आरोपी पुलिस वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाये. क्यूंकि कानून के मुताबिक, किसी भी महिला पर पुरुष पुलिस हाथ नहीं उठा सकता. यहाँ तो महिला और पुरुष दोनों ने मारा है. यहाँ पुलिस दोषी है महिला पत्रकार बेगुनाह.

    इस वीभत्स प्रकरण में पुलिस अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करे और आरोपियों के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाही करे.

  • दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है-राज महाजन

    दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है-राज महाजन

    स्वतंत्रता के बाद, जब समाजीकरण का उदय हुआ तो उस समय महिलाओं की स्थिति बहुत खराब थी. महिला शोषित और अत्याचार का शिकार थी. उस बद्स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने क़ानून-व्यवस्था में महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान बनाए. महिलाओं को विशेषाधिकार दिए गए और महिलाओं ने तरक्की भी की. 

    लेकिन, अब समय बदल चुका है. महिलाओं की स्थिति हर मामले में अच्छी है. बल्कि, कुछ मामलों में महिलाएं पुरुषों से भी आगे बढ़कर हैं. अब महिलाओं की अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं. गृहस्थी से आगे निकलकर महिलाओं की अब अपनी प्राथमिकताएं हैं. अब महिलाएं सुखी-समृद्ध परिवार का हिस्सा बनकर नहीं बल्कि खुद की एक अलग पहचान बनाकर जीना चाहती हैं. परिवार अब बिखराव की ओर हैं.

    इसी दौर में, अब महिलाओं की रूचि {शादी|विवाह) में नहीं है. अगर माता-पिता के दबाब में शादी करनी पड़ गयी या फिर मनमुताबिक परिवार नहीं मिला तो कानून के विशेषाधिकारों का प्रयोग कर परिवार-मर्दन करके महिलाएं अलग हो जाती हैं. ऐसी महिलाएं अपनी शादी तोड़ने के साथ-साथ क़ानून की सहायता से पति से आर्थिक फायदे लेते हुए अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की पूरी व्यवस्था कर लेती हैं. अबला नारी नहीं ‘पुरुष’ हो गया है. दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है. 

    अब 'सिंगल-पैरेंट' का फैशन भी ज़ोरों पर है. शादियाँ टूटने का अनुपात पहले के मुकाबले बहुत ही ज़्यादा बढ़ चुका है जिसका कारण कहीं न कहीं महिलाओं के लिए बनाए गए क़ानून और विशेषाधिकार हैं. इन कानूनों का फायदा असली महिला पीड़ितों को कितना मिला है इसके आंकडें बहुत कम हैं. लेकिन, पुलिस थानों और कोर्ट में 94 प्रतिशत मामले झूठे दर्ज हो रहे हैं. इन कानूनों की वजह से, जो महिलाएं अपने पति, सास-ससुर के प्रति प्रेम-भाव रखते हुए, गृहस्थी का निर्वाह करती थी, उनमें अहंकार और दबंगई की भावना आ गयी. महिलायें मोर्चे की शुरुआत करती हैं बाकी का बचा-खुचा काम मीडिया कर देती है.

    महिला सशक्तिकरण के नाम पर मीडिया और फिल्मकारों ने इन महिलाओं को नकारात्मक सोच का चश्मा पहना दिया, जिसमें उन्हें अपनी परिवार के प्रति जिम्मेदारियां अब अत्याचार लगने लगीं हैं. जो महिलाएं अब तक गृहस्थी का निर्वाह करती थीं, वो घर का काम करने में अपने-आपको शोषित समझने लगीं हैं. जो महिलाएं ख़ुशी-ख़ुशी पति के साथ रहती थीं और सास-ससुर की सेवा करती थीं, उनको वही सब अब अपना अपमान और अत्याचार लगने लगा है. बस फिर क्या, अब लग गयी हैं महिलाएं अपने ऊपर हुए 'शोषण' और 'अत्याचार' का बदला लेने में.

    सुखी परिवार की परिभाषा अब 'सिंगल-पैरेंट' तक सीमित होती जा रही है. पुरुषों का दमन इस स्तर तक पहुँच गया कि उन्होंने क़ानून से लड़ने की बजाय टूटकर खुदख़ुशी जैसे निर्णयों को अपना लिया है. जो कुछ बहादुर थे उनको न्याय-व्यवस्था ने तोड़ दिया.

    जब कोई पुरुष किसी थाने में जाता है तो उसे यह सुनने को मिलता है, "भाई तेरा कुछ न होने का. तू अपनी शिकायत लिख कर दे दे. वो तो 'महिला' है उसकी पहले सुनी जायेगी." न्याय-व्यवस्था के संचालकों द्वारा खुलकर ऐसे पुरुषों पर आर्थिक और मानसिक अत्याचार होता है और वो पुरुष अपने-आपको सिर्फ कोसता रह जाता है.

     जब झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई युद्ध लड़ रही थीं तो महिला सशक्तिकरण जैसी कोई नीति नहीं थी और न ही क़ानून-व्यवस्था में कोई विशेषाधिकार. जिसे अत्याचार के खिलाफ लड़ना होता है, उसके लिए कोई विशेषाधिकार नहीं बल्कि अत्याचार के खिलाफ लड़ने के लिए मन की शक्तिका प्रबल होना ही काफी होता है. सोचने वाली बात यह है कि अगर समाज में सीता, अहिल्या जैसी देवियाँ थीं तो मंथरा, सुपर्न्खा, ताड़का जैसी शैतान औरतें भी थीं. 

    जब तक स्त्री-पुरुषों के लिए सामान अधिकार नहीं रखे जायेंगे, तब तक हम असल मायनों में विकसित नहीं माने जायेंगे. महिलाओं के लिए कानूनी-विशेषाधिकार इस समाज के लिए दीमक के सामान हैं, जो परिवार और समाज को अंदर ही अंदर खोखला करने का काम कर रहे हैं.