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दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना और प्रदर्शन पर रोक के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आज एक अहम फैसला दिया है. जस्टिस एके सिकरी और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने जंतर-मंतर, बोट क्लब अन्य जगहों पर धरना और प्रदर्शन पर लगी रोक को हटाने का आदेश दिया. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि धरना और प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक नहीं लगा सकते.

कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि वो 2 सप्ताह में नई गाइडलाइन जारी करें और धरना प्रदर्शन की इजाजत दे. दरअसल, NGT ने साल 2017 में जंतर-मंतर क्षेत्र में सभी तरह के प्रदर्शन और धरनों पर रोक लगा दी थी और कहा था कि गाय संरक्षण के नाम पर गोवंश और बैलगाड़ी लाना जंतर मंतर क्षेत्र में रह रहे लोगों के लिए मुश्किलों का सबब बनता है.

आपको बता दें कि मजदूर किसान शक्ति संगठन और अन्य लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर NGT के आदेश को चुनौती दी थी और सेंट्रल दिल्ली में शांतिपूर्ण तरीके से धरना प्रदर्शन करने की इजाजत देने की मांग की थी. याचिकाकर्ता का कहना था कि साल 2017 अक्टूबर में NGT ने जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन पर रोक लगा दी थी जबकि पूरी सेंट्रल दिल्ली में दिल्ली पुलिस की ओर से हमेशा के लिए धारा 144 लगाई गई है.

ऐसे में लोगों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन हो रहा है. याचिकाकर्ता का ये भी कहना था कि संविधान से मिले मौलिक अधिकार का हनन नहीं किया जा सकता और दिल्ली पुलिस द्वारा लागू की गई धारा 144 मनमानी और गैरकानूनी है. याचिका में संगठन ने सुझाया है कि इंडिया गेट के पास बोट क्लब पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक तौर पर इजाजत दी जा सकती है.
 



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