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आज है सावन की शिवरात्रि, इस मुहूर्त पर जल चढ़ाने का है विशेष महत्व

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देवों के देव महादेव के पूजन का खास महीना सावन शुरू होते ही शिवालयों में भोले भंडरी के जयकारों की गूंज हो रही है. सावन के पवित्र महीने में आज शिवरात्रि का त्योहार मनाया जा रहा है. सुबह से ही देश के सभी मंदिरों में कावड़िए गंगा का जल शिवलिंग पर अर्पित कर रहे हैं.  

दिल्ली, बिहार, हरियाणा समेत तमाम जगहों पर शिवालयों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ दिखाई दे रही है. शिव के दर्शन पाने और उन्हें जल, फूल, दूध अर्पित करने के लिए कतारों में खड़े हैं. साल में 12 से 13 श‍विरात्र‍ि आती है. हर महीने आने वाली शिवरात्रि को मासिक शिवरात्रि कहा जाता है, लेकिन इस महीने आने वाली शिवरात्रि को सावन की शिवरात्रि कहा जाता है.  

शिवरात्र‍ि पर भगवान शंकर की पूजा का सबसे शुभ समय होता है नि‍शिता काल यानी मध्‍य रात्र‍ि. माना जाता है कि मध्यरात्रि को जो भी भक्त शिव की अराधना करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. धार्मिक मान्यता के मुताबिक, सावन की शिवरात्रि के दिन अगर पुरुष व्रत रखकर भगवान शिव को जल अर्पित करता है तो उसे धन और सुख की प्राप्ति होती हैं. वहीं, महिलाओं के लिए कहा जाता है कि इस दिन व्रत रखकर पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और उन्हें सौभाग्य वारदान देते हैं. कुंवारी कन्‍याओं को सुयोग्‍य एवं सुंदर जीवन साथी प्राप्‍त होता है. ऐसा भी कहा जाता है कि जिन महिलाओं को संतान की इच्छा होती है उन्हें व्रत रखने से संतान की प्राप्ति होती है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवरात्रि के दिन शिव को जल अर्पित करने से वह प्रसन्न होते हैं और भक्त की सभी मनोकमानाओं को पूर्ण करते हैं. धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक, शिवरात्रि के दिन ही महादेव शिवलिंग के रूप में धरती पर प्रकट हुए थे और उन्हें प्रसन्न करने के लिए खुद माता लक्ष्मी और सरस्वती ने उपवास रखा था.



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