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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद सबरीमाला मंदिर में 10 साल की बच्ची से लेकर 50 साल तक की कोई भी महिला प्रवेश नहीं कर सकी. मंदिर के पट छह दिन खुले रहने के बाद सोमवार रात 11 बजे एक महीने के लिए बंद कर दिए जाएंगे. यहां कई महिलाओं ने प्रवेश की कोशिश की, लेकिन भारी विरोध की वजह से उन्हें कामयाबी नहीं मिली.

सुप्रीम कोर्ट इस मामले में दायर की गईं नई रिव्यू पिटीसन पर मंगलवार को सुनवाई करेगा. शीर्ष अदालत ने 28 सितंबर को सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश करने की इजाजत दी थी. इस आदेश के बाद 17 अक्टूबर को मंदिर मासिक पूजा के लिए खोला गया था.

सबरीमाला मंदिर में भगवान अयप्पा की मूर्ति स्थापित है. माना जाता है कि वे ब्रह्मचारी हैं. ऐसे में यहां पीरियड की उम्र (10 से 50 साल) वाली महिलाओं का प्रवेश प्रतिबंधित था. यह प्रथा 800 साल से चली आ रही थी.

सबरीमाला मंदिर पत्तनमतिट्टा जिले के पेरियार टाइगर रिजर्व क्षेत्र में है. 12वीं सदी के इस मंदिर में भगवान अय्यप्पा की पूजा होती है. मान्यता है कि अय्यपा, भगवान शिव और विष्णु के स्त्री रूप अवतार मोहिनी के पुत्र हैं. दर्शन के लिए हर साल यहां करीब पांच करोड़ लोग आते हैं.



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