रसगुल्ले की लड़ाई में आखिरकार पश्चिम बंगाल को मिली जीत, ममता ने दी बधाई

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लोकप्रिय मिठाई रसगुल्ले को लेकर पश्चिम बंगाल और ओडिशा के बीच चली आ रही रस्साकशी अब समाप्त हो गई है और यह तय हो गया है कि रसगुल्ला मूल रूप से पश्चिम बंगाल में बनना शुरू हुआ था. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज बताया कि उनके राज्य को रसगुल्ले के लिए भौगोलिक संकेत या जीआई का दर्जा दिया गया है.

इस समय लंदन में मौजूद ममता ने ट्वीट किया, ‘‘हमारे लिए खुशखबरी है. हम इस बात को लेकर खुश एवं गौरवान्वित हैं कि पश्चिम बंगाल को रसगुल्ले के लिए जीआई का दर्जा दिया गया है.’’ इस बात को लेकर पश्चिम बंगाल और पड़ोसी ओडिशा के बीच जून 2015 से इस बात को लेकर कानूनी लड़ाई चल रही है कि रसगुल्ले का मूल कहां है.

विश्व व्यापार संगठन के तहत जीआई एक ऐसा संकेत है जो किसी उत्पाद के किसी एक विशेष स्थान से उद्भव के बारे में बताता है.

रसगुल्ले की खोज कहां हुई? ये सवाल सबसे पहले 2011 में सियासी मुद्दा बना. पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी दूसरी बार सीएम बनीं. उन्होंने रसगुल्ले पर पश्चिम बंगाल का दावा करते हुए कहा कि इसकी खोज यहीं हुई. ममता ने इसके जीआई सर्टिफिकेशन के लिए अप्लाई किया.

ममता के बाद ओडिशा की नवीन पटनायक सरकार सामने आई. उसने भी इसी सर्टिफिकेशन के लिए दावा कर दिया. ओडिशा सरकार का कहना है कि पुरी के जगन्नाथ मंदिर में लंबे वक्त से यह डिश भगवान को प्रसाद के तौर पर चढ़ाई जाती रही है. लिहाजा, यह माना जाना चाहिए कि इस डिश की खोज ओडिशा में हुई. 

2015 में दोनों राज्यों ने जीआई टैग हासिल करने के लिए वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन का रुख किया. अब फैसला पश्चिम बंगाल के फेवर में आया है.

पश्चिम बंगाल का दावा है कि 1868 में कलकत्ता के नोबिन चंद्रा दास ने रोसोगुल्ला की खोज की थी. पश्चिम बंगाल में इस नाम से स्वीट्स चेन भी है.



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