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दिनभर उर्जा खर्च करने वाले जीव आलसियों से कम जीते हैं, वैज्ञानिकों का दावा

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चार्ल्स डार्विन के ‘सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट’ सिद्धांत के उलट वैज्ञानिकों ने एक नई खोज की है. कुछ समुद्री जीवों पर रिसर्च के बाद वैज्ञानिकों ने दावा किया कि जो प्रजातियां रोजमर्रा की जिंदगी में ज्यादा ऊर्जा खर्च करती हैं, वे कम ऊर्जा खर्च करने वाले अपने समकक्षों के मुकाबले कम जीती हैं. यानी कामकाजी प्रजातियों के मुकाबले आलसी ज्यादा जीते हैं. वैज्ञानिकों ने रिसर्च में करीब 299 अलग-अलग समुद्री जीवों को शामिल किया. इनमें सबसे ज्यादा ऊर्जा खर्च करने वाले समुद्री घोंघे और सीप भी रखे गए. 

रिसर्च में पाया गया कि ज्यादा ऊर्जा खर्च करने की वजह से इन जीवों का मेटाबॉलिज्म (चयापचय) तेज था, जबकि कम ऊर्जा खर्च करने वालों का मेटाबॉलिज्म काफी कम था. कंसास यूनिवर्सिटी में बॉयोलॉजी के प्रोफेसर ब्रूस लिबरमैन के मुताबिक, मेटाबॉलिज्म जितना धीमा होगा, जीने की क्षमता उतनी ज्यादा होगी. दरअसल, कम ऊर्जा खर्च करने वालों को खाने के जरिए कम ऊर्जा की जरूरत होती है. ऐसे में वे मुश्किल से मुश्किल हालात में आसानी से जीवित रह सकते हैं. इससे उलट ज्यादा ऊर्जा खर्च करने वालों को मुश्किल हालात में भी ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती है और अगर इसकी पूर्ति न हो तो वे कमजोर होकर जल्द मर जाते हैं.

प्रोसिडिंग्स ऑफ रॉयल सोसाइटी बी में छपे इस रिसर्च के जरिए संरक्षणकर्ता अब जल्द पता लगा सकते हैं कि कौन से जीव जलवायु परिवर्तन की वजह से जल्द खत्म हो सकते हैं. दुनियाभर में लगातार बदल रही जलवायु की वजह से कई जीवों का भोजन खत्म होने की कगार पर है. ऐसे में ज्यादा ऊर्जा लगाने वाले जीवों पर पहले लुप्त होने का खतरा है. वैज्ञानिकों का कहना है कि अब वे इस पर रिसर्च करेंगे कि जमीन पर रहने वाले जानवर और मनुष्यों पर भी ये नियम लागू होता है या नहीं? हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि रिसर्च का यह मतलब बिल्कुल नहीं कि आलसी लोग स्वस्थ होते हैं.



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