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न्यूजीलैंड ने वर्ल्ड कप के पहले सेमीफाइनल में भारत को 18 रनों से हरा दिया. इस हार के बाद टीम इंडिया का 8 साल बाद चैम्पियन बनने का सपना टूट गया. भारत को इस टूर्नामेंट में दूसरी बार हार का सामना करना पड़ा. टीम ने सेमीफाइनल को छोड़कर पिछले आठों मैचों में बेहतरीन प्रदर्शन किया था. टॉप-10 बल्लेबाजों में भारत के रोहित शर्मा और विराट कोहली शामिल हैं. वहीं,जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद शमी टॉप-10 गेंदबाजों में शामिल हैं.

पांच भारतीय गेंदबाजों ने इस वर्ल्ड कप में 10+ विकेट लिए. तीन गेंदबाजों की इकोनॉमी रेट टॉप-10 में रहा. बुमराह ने 18 और शमी ने 14 विकेट अपने नाम किए. युजवेंद्र चहल ने 12, भुवनेश्वर कुमार ने 10 और हार्दिक पंड्या ने 10 विकेट लिए. पेस अटैक को बुमराह, शमी और भुवनेश्वर ने संभाला. उनकी मदद हार्दिक पंड्या ने की. वहीं, लेग स्पिनर चहल ने भी अपने प्रदर्शन से प्रभावित किया. आखिरी दो मैचों में जडेजा ने 3.70 की इकोनॉमी रेट से रन देकर दो विकेट लिए.

जडेजा ने 2 मैच में 2 विकेट लेने के साथ-साथ 3 कैच भी लिए. उन्होंने सेमीफाइनल में 77 रन की पारी खेली. संजय मांजरेकर की आलोचना के बाद उनको ट्विटर पर जवाब भी दिया. उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ जिम्मेदारी के साथ अर्धशतक लगाया. टूर्नामेंट से पहले उनकी इमेज ऐसे स्पिनर की थी जो कभी-कभी बल्लेबाजी भी कर सकता है, लेकिन 77 रन की पारी के बाद उन्होंने खुद को ऑलआउडर के तौर पर साबित किया है.

लोकेश राहुल ने इस वर्ल्ड कप में ओपनर के तौर पर 7 मैच खेले. इस दौरान 324 रन बनाए. उनका औसत 46.28 का रहा. एक शतक और दो अर्धशतक लगाए. वहीं, मध्यक्रम में दो बार बल्लेबाजी की. तब राहुल ने 2 मैच में सिर्फ 37 रन बनाए. उन्होंने शिखर धवन के बाद टीम को संभाला और खुद को ओपनर के तौर पर साबित भी किया. टूर्नामेंट के दौरान कई इंटरव्यू में उन्होंने कहा भी कि यह उनका सबसे पसंदीदा बल्लेबाजी क्रम है.

इस वर्ल्ड कप में अब तक सबसे ज्यादा 648 रन बनाने वाले रोहित शर्मा ने 5 शतक लगाए. टूर्नामेंट से पहले कई बार बल्लेबाजी में निरंतरता नहीं होने के कारण उनकी आलोचना हो चुकी थी. उन्होंने लगातार तीन मैच में शतक लगाए. 3 दोहरे शतक लगाने वाले रोहित ने बड़े शतक लगाने की जगह टिककर बल्लेबाजी की. उन्होंने 30 से ज्यादा ओवरों तक बल्लेबाजी की. निरंतरता आने के बाद उनकी बल्लेबाजी एक लेवल ऊपर हो गई.

पिछले वर्ल्ड कप के बाद भारतीय टीम ने चौथे क्रम पर अजिंक्य रहाणे, अंबाती रायडू, दिनेश कार्तिक, केदार जाधव, श्रेयस अय्यर, विजय शंकर को फिट करने की कोशिश की. रायडू तो पिछले चार साल में 26 मुकाबलों में खेले. उन्होंने 56.68 की औसत से 907 रन भी बनाए, लेकिन वर्ल्ड कप टीम में उन्हें शामिल नहीं किया गया. उनकी जगह विजय शंकर को इंग्लैंड ले जाया गया, लेकिन वे 3 मैच में 29 की औसत से 58 रन ही बना सके. बीच टूर्नामेंट में चोटिल होकर बाहर हो गए. उनकी जगह ऋषभ पंत को टीम में शामिल किया, लेकिन वे भी बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे.



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