रामपाल हत्या के दोनों मामलों में दोषी करार, हिसार कोर्ट ने सुनाया फैसला

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सतलोक आश्रम संचालक रामपाल पर चार साल बाद हत्या के केस में हिसार की विशेष अदालत ने आज गुरुवार (11 अक्टूबर) को फैसला सुनाया. हिसार कोर्ट ने साल 2014 में आश्रम में हुई हिंसा के दौरान हुई मौत के मामले में रामपाल को दोषी करार दिया है. हत्या के दोनों मामलों पर विशेष दालत ने अपना फैसला सुनाया है. विडियो कांफ्रेंस के जरिए कोर्ट ने ये फैसला सुनाया. अतिरिक्त सेशन जज डीआर चालिका ने फैसला सुनाया. सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए जेल परिसर के बाहर नाका लगाकर भारी पुलिस बल और आरएएफ के जवानों को तैनात किया है. 

किसी भी संभावित बवाल, हिंसा और तोड़फोड़ जैसी घटनाओं से निपटने के लिए पुलिस ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं. हिसार जिले में धारा-144 लागू कर दी गई है. अदालत के चारों ओर तीन किलोमीटर का सुरक्षा घेरा बनाया गया है. इस सुरक्षा घेरे को भेदकर कोई भी बाहरी व्यक्ति अंदर प्रवेश नहीं कर सकेगा. हिसार के रेलवे स्टेशन पर रेलवे पुलिस के साथ साथ पैरामिलिट्री फोर्स तैनात की गई हैं. मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं.

आपको बता दें कि गुरमीत राम रहीम मामले की सुनवाई के दौरान उनके समर्थकों ने पंचकुला में बड़े पैमाने पर हिंसा की थी. इसलिए प्रशासन पहले से ही एहतियात बरत रहा है. प्रशासन को अंदेशा है कि सुनवाई के दौरान रामपाल के 10 से 20 हजार श्रद्धालु कोर्ट परिसर, सेंट्रल जेल, लघु सचिवालय, टाउन पार्क और रेलवे जैसी जगहों पर इकट्ठा हो सकते हैं. पंचकूला में डेरा सच्चाल सौदा प्रमुख गुरमती राम रहीम को फैसला सुनाए जाने के समय हुई चूक से सबक लेकर सरकार और पुलिस सुरक्षा में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती है.

18 नवंबर 2014 को सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल को बरवाला स्थित आश्रम से बाहर निकालने के लिए पुलिस ने अभियान शुरू किया था. पहले ही दिन काफी लोग घायल हुए थे, लेकिन समर्थक नहीं हटे थे. अगले दिन रामपाल स्वयं बाहर निकला था. इस दौरान पांच महिलाओं सहित एक बच्चे की मौत हुई थी. इस संबंध में पुलिस ने एफआईआर नंबर 429 और 430 नंबर दर्ज की थी. एफआईआर नंबर 429 में रामपाल के अलावा 15 लोग और एफआइआर नंबर 430 में रामपाल सहित 14 लोगों पर केस दर्ज किया गया था. 

रामपाल पर पुलिस ने नवंबर 2014 में सात केस दर्ज किए थे. इसमें देशद्रोह, हत्या, अवैध रूप से सिलेंडर रखने आदि काफी मामले हैं. रामपाल इनमें से दो केसों में बरी हो चुका है. इन दोनों केसों में पुलिस कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं कर सकी थी, जिस पर कोर्ट ने भी टिप्पणी की थी. एक मुकदमे से अदालत ने रामपाल का नाम हटा दिया था.



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