रक्षाबंधन के अवसर पर बांधे वैदिक राखी, होगा सब कुछ अच्छा

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भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन का त्योहार 7 अगस्त को है. सारे बाजार एक से एक सुंदर कीमती राखियों से भर गए हैं. राखियों की इस भीड़ में से हर बहन अपने प्यारे भाई के लिए एक ऐसी राखी खोज लेना चाहती है, जो बेजोड़ हो, अनमोल हो और भाई के लिए हर तरह से शुभ हो.
लेकिन क्या आप जानती हैं कि अपने भाई को जीवनभर संपूर्ण सुख, संपदा, यश, स्वास्थ्य, और उन्नति का आशीर्वाद देने और उसे हर अमंगल से बचाने में सक्षम एक अनमोल राखी आप घर पर बना सकती हैं. इस राखी का नाम है वैदिक राखी और अपने नाम के अनुरूप इसका संबंध वेदों में वर्णित उन समस्त शुभ और मंगल वस्तुओं से है, जो किसी भी व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है.  वे सब आपके घर में ही उपलब्ध हों. बहुत ही सरल और पवित्र वस्तुओं से तैयार होने वाली इस राखी को बनाने में अधिक वक्त भी नहीं लगता और हर तरह से आपके भाई के जीवन में शुभता का संचार करती है. यह भी पढ़े: इस रक्षाबंधन बहनें रखें इन बातोँ का ध्यान
राखी बनाने में लगने वाली वस्तुएं इस प्रकार हैं ऊनी, रेशमी या सूती पीला कपड़ा दूर्वा अक्षत या चावल केसर या हल्दी चंदन सरसों या राई के दाने

 वैदिक राखी

केसर: केसर की प्रकृति तीक्ष्ण होती है. वैदिक राखी के माध्यम से यही तीक्ष्णता भाई के जीवन में प्रवेश करती है और उसके तेज, ज्ञान और बल में वृद्धि होती है. केसर के स्थान पर यदि हल्दी का उपयोग किया गया हो, तो हल्दी भी जीवन में आरोग्यता और सकारात्मकता का विकास करती है. दोनों ही वस्तुएं भाई के उत्तम स्वास्थ्य और उन्नति की कामना को साकार करती हैं.

चंदन: चंदन अपनी प्रकृति से ही शीतल होता है. वैदिक राखी में चंदन भाई के जीवन में शीतलता लाने और उसे समस्त तनावों से दूर रखने के लिए समाहित किया गया है. चंदन से युक्त राखी बांधने का संदेश यह भी रहता है कि भाई के जीवन में सदाचार, पवित्रता और सज्जनता का समावेश हो और चंदन के भांति ही उसके सद्गुणों की सुगंध दूर-दूर तक फैले.

 सरसों: सरसों की प्रकृति तीक्ष्ण होती है। यह दुर्गुणों का नाश करती है. वैदिक राखी में सरसों का समावेश इसलिए किया जाता है ताकि भाई के दुर्गुणों का नाश हो. साथ ही यदि कोई व्यक्ति उसे नुकसान चाहता है, तो उसका भी शमन हो सके.



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