रजनीश गुरबाणी ने 44 साल बाद दोहराया यह कारनामा, रणजी ट्रॉफी फाइनल में हैट्रिक लेने वाले दूसरे गेंदबाज बने

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होल्कर स्टेडियम में चल रहे 84वें रणजी ट्रॉफी फाइनल में 24 साल के रजनीश गुरबानी की शानदार बॉलिंग की वजह से विदर्भ ने दिल्ली की टीम को 295 रन पर समेट दिया। रजनीश ने शनिवार को दूसरे दिन का खेल शुरू होने के कुछ देर बाद ही हैट्रिक लगाई। 44 साल बाद दूसरा मौका है, जब किसी प्लेयर ने यह कारनामा किया। इससे पहले 1973 में तमिलनाडु के बी कल्याण सुंदरम ने मुंबई के खिलाफ फाइनल में हैट्रिक जमाई थी।

गुरबानी से पहले 1972/73 के फाइनल में मुंबई के खिलाफ तमिलनाडु के बी कल्याण सुंदरम ने हैट्रिक ली थी। उस वक्त मुंबई टीम का नाम बॉम्बे था। सुंदरम के शानदार प्रदर्शन के बाद भी तमिलनाडु की टीम 123 रन से हार गई थी।

सेमीफाइल में गुरबानी के प्रदर्शन की बदौलत ही विदर्भ ने कर्नाटक को हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। इस मैच में गुरबानी ने कुल 12 विकेट लिए थे, दूसरी पारी में दूसरी इनिंग में 7 विकेट झटके थे। उनके इस परफॉर्मेंस की बदौलत विदर्भ ने कर्नाटक को हराया था।

दूसरे दिन शनिवार को दिल्ली टीम के ध्रुव शौरे और विकास मिश्रा ने 271 रन से आगे खेलना शुरू किया। गुरबानी ने तीनों प्लेयर्स बोल्ड किए। सबसे पहले गुरबानी ने 101वें ओवर की पांचवीं गेंद पर विकास मिश्रा को, फिर अगली बॉल पर नवदीप सैनी को बोल्ड किया। फिर अगले ओवर की पहली गेंट पर 150 के करीब पहुंच रहे ध्रुव शौरे को आउट किया। इस तरह दिल्ली की टीम 295 रन पर ऑलआउट हो गई। रजनीश ने 24 ओवर में केवल 59 रन देकर कुल 6 विकेट लिए।

83 साल के रणजी ट्रॉफी इतिहास में ये पहला मौका है, जब एक साल में दो रणजी फाइनल हो रहे हैं और वो भी एक ही ग्राउंड पर। इससे पहले 2016-17 का रणजी फाइनल मुकाबला भी इंदौर के होल्कर स्टेडियम में गुजरात और मुंबई के बीच हुआ था। 10 से 14 जनवरी तक हुए इस मुकाबले में गुजरात चैम्पियन बना था।



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