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राहुल संग बदली सी कांग्रेस- राज कुमार गुप्ता

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राहुल गाँधी कांग्रेस के अध्यक्ष क्या बने, पूरी पार्टी के तेवर ही बदल गये हैं. अध्यक्ष होने के नाते राहुल पुरजोर कोशिश भी कर रहे हैं पार्टी में जान फूंकने की. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी में नई चमक लाने की कोशिश शुरू कर दी है. अब राहुल अपने हिसाब से संगठन को एक नया रूप दे रहे हैं. वह महसूस कर रहे हैं कि बदलते दौर में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को अपनी शैली बदलनी ही होगी. वे पार्टी संगठन में बदलाव कर रहे हैं और अधिक से अधिक युवाओं को जिम्मेदारी दे रहे हैं. अलग-अलग राज्यों के वरिष्ठ पदाधिकारियों के दफ्तरों में उनके सहायकों के रूप में 44 में से 30 नए सचिव चुने गए हैं. 

माना जा रहा है कि लगभग 70 युवा नेताओं की सूची सेवाओं के लिए बना ली गयी है. कई राज्यों में नए नेताओं को अहम जवाबदेही सौंपी गई है. कांग्रेस की इस बात के लिए अक्सर आलोचना होती रही है कि पार्टी संगठन में जड़ता आ गई है. उसमें ऐसे लोगों की कमी हो गई है जो नए जोश के साथ काम कर सकें. राहुल गांधी जब कांग्रेस में पहली बार सक्रिय हुए तो उन्होंने कई युवा नेताओं को संगठन में जगह दी थी. 

हालांकि यह प्रक्रिया जोर नहीं पकड़ पाई. कांग्रेस एक उलझन में पड़ी रही. हो सकता है इस बात की हिचक रही कि ऊपर से नीचे तक एकबारगी बदलाव से वरिष्ठ नेताओं में नाराजगी आ सकती है और एक अंदरूनी टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है. राजीव गांधी के दौर में ऐसे हालात से पार्टी को गुजरना पड़ा था, तब कई सीनियर लीडर ने अपनी अलग राह पकड़ ली थी. शायद इसलिए राहुल गांधी ने अपने कदम धीमे कर लिए, लेकिन पार्टी की कमान आने के बाद वह युवाओं को आगे लाने के अपने अजेंडे पर दृढ़तापूर्वक लौट आए हैं. उन्होंने कांग्रेस के महाधिवेशन में इसके संकेत दे दिए थे. तब पार्टी के बुजुर्ग नेताओं को मंच के बजाय सामने कुर्सियों पर बिठाया गया था. राहुल गांधी ने अपने भाषण में दोहराया कि पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच खड़ी दीवार को गिराना और पीछे बैठे लोगों को सामने की पक्ति में लाना उनकी प्राथमिकता है. 

पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह को कमान दी गई, उनको स्वतंत्रता दी गई. कर्नाटक में भी सिद्धारमैया को अहम निर्णय लेने की छूट दी गई. उनकी सलाह पर ध्यान दिया गया. अशोक गहलोत और गुलाम नबी आजाद जैसे नेताओं को भी अहम जिम्मेदारी दी गई है. राहुल गांधी के अपने-अपने समुदायों में पकड़ रखने वाले जिग्नेश मेवानी और हार्दिक पटेल जैसे नेताओं से मिलने का पॉजिटव संदेश गया है. कांग्रेस में ऐसे नेताओं को बढ़ावा देने की जरूरत है, जो जमीनी स्तर पर कार्य कर सकें और जनता से संवाद कायम कर सकें. इसलिए जो युवा पार्टी से जुड़ रहे हैं, उनकी बातें सुनी जाएं और उन्हें स्वतंत्र रूप से कार्य करने दिया जाए. 

आज राहुल खुद भी रैलियों को संबोधित करते हैं. कर्नाटक में होने वाली रैलियां इसी बात का परिणाम है जो उन्होंने पार्टी की कमान अपने हाथ में लेली.



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