राफेल सौदे पर सुप्रीम कोर्ट में अटॉर्नी जनरल ने कहा- लीक दस्तावेजों को पुनर्विचार याचिका से हटा दें, फैसला सुरक्षित

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उच्चतम न्यायालय ने राफेल लड़ाकू विमान सौदे के मामले में अपने फैसले पर पुनर्विचार की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की. सरकार की तरफ से अदालत में पेश हुए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने अदालत से कहा कि वह लीक दस्तावेजों को पुनर्विचार याचिका से हटा दें क्योंकि सरकार इन दस्तावेजों पर विशेषाधिकार का दावा करती है.

इसके जवाब में अदालत ने पूछा कि आप किस तरह के विशेषाधिकार का दावा कर रहे हैं? वे उन्हें पहले ही अदालत में पेश कर चुके हैं. यह दस्तावेज पहले से ही सार्वजनिक हो चुके हैं. जिसके जवाब में अटॉर्नी जनरल ने कहा कि उन्होंने इसे चुराकर अदालत में पेश किया है. राज्य के दस्तावेजों को बिना स्पष्ट अनुमति के प्रकाशित नहीं किया जा सकता है.

अटार्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि साक्ष्य अधिनियम के प्रावधानों के तहत कोई भी संबंधित विभाग की अनुमति के बिना अदालत में गोपनीय दस्तावेज पेश नहीं कर सकता. जिस पर कोर्ट ने आरटीआई की धारा 22 और 24 का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां तक कि खुफिया एजेंसी और सुरक्षा प्रतिष्ठान भी भ्रष्टाचार और मानव अधिकारों के उल्लंघन के बारे में जानकारी देने के लिए बाध्य हैं.

प्रशांत भूषण ने दलील देते हुए कहा- जिन दस्तावेजों का हवाला दिया जा रहा है, वो पहले से ही पब्लिक डोमेन में है. सरकार द्वारा सुरक्षा की दुहाई देकर विरोध करने का कोई मतलब नहीं है.



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