आज मनाई जा रही है राधाष्टमी, इस विधि से व्रत करने पर मिलेगा महालक्ष्मी और सरस्वती का आशीर्वाद

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भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी को एक-दूसरे का पूरक कहा गया है. कृष्ण से जुड़े किसी भी ग्रंथ में राधा का प्रसंग, भगवान के लीलाधर रूप को संपूर्ण बनाता है. कृष्ण और राधा के आध्यात्मिक प्रेम को हिन्दू शास्त्रों में सौंदर्य और श्रृंगार से ज्यादा, भक्तिपूर्ण बताया गया है. भक्तिकाल के प्रसिद्ध कवि सूरदास ने कृष्ण और राधा के संबंध को लोक से परे लोकोत्तर बताया है. सूरदास के लेखन में राधा, प्रेम-प्रतिमा और प्रेम-प्रतीक के रूप में हमारे सामने आती हैं. सूरदास ने राधा को अद्भुत सौंदर्य का धनी और मोहक लावण्य से भरी हुई भगवान की प्रेयसी के रूप में वर्णित किया है. बृजभूमि में भगवान श्रीकृष्ण और गोपियों के बीच होने वाली रास-लीला में सूरदास ने राधा को मूल क्रियाशक्ति बताया है. राधा की इन्हीं विशेषताओं के कारण उन्हें कई नामों से जाना जाता है. यूं तो राधा रानी के अनगिनत नाम हैं, लेकिन आज राधाष्टमी पर आइए जानते हैं राधा के कुछ प्रमुख नामों के बारे में.


सौंदर्य से जुड़े नाम- राधा राधिका, मदन मोहिनी, यशस्विनी यशोगमया, यशोदानंद वल्लभा, दामोदर-प्रिया, त्रैलोक्य सुंदरी, जया, जया प्रदा, विमलांगी, अपराजिता, हेम सुंदरी, मानिनी.

कृष्ण से जुड़े नाम- कृष्ण-वल्लभ, कृष्ण संयुक्ता, कृष्ण-प्रिया, कृष्ण कांता, कृष्णानंद प्रदायिनी, कृष्णांगवासिनी, विष्णु प्रिया, विष्णु-अंग निवासिनी, विष्णुकांता, जगन्नाथ-प्रिया, पुंडरीकाक्ष-सेविका.

रास से जुड़े नाम- रासेश्वरी, रस-वासिनी, परम वियोगिनी, रास-प्रिया, रास गम्या, रासिका, रासिकानंदा, रास-मंडल शोभिता, भक्ति-प्रिया, यशोदानंद-पत्नी, यशोदानंद-गेहिनी, रस-मंडल मध्यस्थ.

गोकुल से जुड़े नाम- गोपी, प्रधान गोपिका, गोपानंदकारी, गोप-कन्या, गोकुलानंद कर्त्री, गोकुलानंद दायिनी, नंद प्रिया, वृषभानु कुमारी, गोप-पत्नी, नंद-प्रिया

वृंदावन से जुड़े नाम- वृंदावनेश्वरी, वृंदावन विहारी, वृंदा, वृंदावन-प्रिया, वृंदावन-विलासिनी.

राधा के सौंदर्य का अद्भुत वर्णन-

भक्तिकाल के कवि सूरदास ने अपने लेखन में राधा-रानी को सौंदर्य की प्रति-मूर्ति बताया है. उन्होंने राधा का वर्णन, परम सुंदरी बालिका के रूप से लेकर रास-लीला में उनकी भूमिका और कृष्ण के जीवन में राधा के महत्व तक किया है. ‘भक्ति आंदोलन और सूरदास’ शीर्षक पुस्तक में सूरदास को उद्धृत करते हुए कहा गया है कि सूरदास ने रास-लीला के समय राधा के रूप का नख-शिख वर्णन किया है. सूरदास कहते हैं-

काम कमान-समान भौंह दोउ, चंचल नैन सरोज।
अलि-गंजन अंजन-रेखा दै, बरषत बान मनोज।
कंबु कंठ नाना मनि भूषण, उर मुक्ता की माल।
कनक किंकिनी-नूपुर-कलरव, कूजत बाल मराल।
चौकी हेम, चंद्र-मनि लागी, रतन जराइ खचाई।
भुवन चतुर्दस की सुंदरता, राधे मुखहिं रचाई।



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