कविता : त्यौहार मनाया जाता है

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खुलकर हर त्यौहार मनाया जाता है,
हर दिल में प्यार जगाया जाता है.

ये लोहड़ी-संक्रांति वाला शहर है,
यहाँ ना मौके पर मुँह छिपाया जाता है.

कोई नाराज़ नहीं होता यहाँ ,
हमारे शहर में प्यार बंटा करता है.

गुले-गुलज़ार की आशनाई में ज़ालिम,
ग़ज़्ज़क-रेवड़ी का अंबार लगा करता है.


                                       योगेंद्र खोखर
 



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