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मुझको बुलाता है

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जो बच्चा रोता, कभी मुस्कराता रहता है,
खुदा ये खेल खुद उस को सिखाता रहता है. 

तुम अपने दावों की सूरत बिगाड़ दोगे ख़ुद, 
वफ़ा परस्त वफायें निभाता रहता है. 

तुम्हारे प्यार का इतना असर हुआ मुझ पर, 
ये दर्द मुझको को मुसलसल जगाता रहता है. 

हंसी ख़ुशी तुम्हें रुखसत मैं करता हूँ लेकिन, 
मेरा सुकून उसी लम्हा जाता रहता है. 

अगर है प्यार तो इज़हार इसका खुल के करो,
जो बदनसीब है, सपने सजाता रहता है.

वो बेवफा है, नहीं आयेगा तेरे दिल तक, 
तू किस के वास्ते आँखें बिछाता रहता है. 

अंधेरी रात में आवाज़ आती है ‘जोगी’,
न जाने कौन है, मुझको बुलाता रहता है.
                              - Dr. Sunil Jogi



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