किस्सा

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एक मामूली इंसान का किस्सा है,
हर सुख में दुख में इसका हिस्सा है.
कार्य करता हरदम नही कहीं आराम है,
कर्म ही इसका जीवन और भगवान है.

कभी कहता है मानता नहीं ईश्वर को,
हर समय पर मन में बाँचता राम राम है.
धर्म से कोई वास्ता नहीं ऐसा सोचता है ये,
धर्म के वास्ते एक दूसरे का मुँह नोचता है ये.

खास दिन क्या होते हैं ये नही जानता है,
हर दिन खुशी दिवस है ये यूँ ही मानता है.
आखिर गेंद पर लगे छक्के से प्रफुल्लित,
हर क्षेत्र में जीतूँगा अब ये मासूम ठानता है.
                                      -योगेंद्र खोखर



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