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कविता : ख्याल

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अहमकियाना ख्याल दिल में आया है,
कूलर को क्या शोर करने को बनाया है.
भर भरके पानी जितने पसीने बहाये मैंने,
इतना तो ठंडी हवा को नहीं मैंने पाया है.

चिंता लोगों को है लाल किला की अचानक,
ऋषभ की बैटिंग से दिल मैंने बहलाया है.
हर बार नापसंद टीमें मैच जीता करती हैं,
इसी विचार से बेचारा दिल भर आया है.

बड़े शौक से जिसने हर बार खाना खाया है,
उसीको लोगों ने डाइटिंग करके लजाया है.
इस समय यह नहीं खाते उस समय यह नही,
कहकर क्यूँ इस क़दर भले मानुष को सताया है.

काम करके उसने दुनिया में स्थान जो बनाया है,
फुर्सत में उसको जरा खेल कूद अब रास आया है.
धूप की कमी से विटामिन कम हो जाया करता है,
गोपियाँ मिलें ना मिले धूप में श्याम रंग अपनाया है.

                                                        योगेंद्र खोखर
 



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