कविता: दरोगा जी बतायेंगे

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भला कब अपनी कमजोरी दरोगा जी बतायेंगे,
कहाँ होनी है अन चोरी दरोगा जी बतायेंगे.

किसी मासूम को लॉकअप में जी भर के जो मिलती है,
वो सारी गालियाँ, लोरी दरोगा जी बतायेंगे.

यहाँ अपराध पर अंकुश अभी तक लग नहीं पाया,
मगर अपराध की डोरी दरोगा जी बतायेंगे.

इन्हें सरकार से इनाम भी पाने का चस्का है,
अभी बूढ़ी को भी छोरी दरोगा जी बतायेंगे.

विदेशी और देशी बैंकों में जो डिपाजिट हैं,
कहाँ काली, कहाँ गोरी दरोगा जी बतायेंगे.

किसानों के घरों में धान, गेंहूँ, बाजरा देखा,
इन्हें बारूद की बोरी दरोगा जी बतायेंगे.

ये ठेले, खोमचे वाले नहीं बोलेंगे कुछ ‘जोगी’,
किसे कहते हैं बरजोरी, दरोगा जी बतायेंगे.

                                          डॉ. सुनील जोगी 



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