कविता : उम्मीद

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तू ही मेरी उम्मीद तू ही मेरी आरजू तू ही मेरा विश्वास, 

मेरी बेटी मेरे बेटे तुम ही हो मेरी हिम्मत तुम ही हो मेरी आस.

रख भरोसा किस्मत पे न कर शक क्षमता पे,

मान लो जान लो जान लो मान लो एक दिन सारे सपने हो जायेंगे साकार.

नहीं तेरी मेहनत कभी जाएगी बेकार क्यूंकि तुझ पे ही है मेरे जीवन की आस,

तेरी माँ ने हमेशा प्यार कितना किया ये समझने के दिन आएंगे मेरे यार.

अभी तो अपने सपने बुनता जा दिन ख़ुशी और मोहब्बत के गिनता जा,

नहीं सोचो कभी ये क्या हो रहा है क्यों तुम जग रहे हो और ये जहाँ सो रहा है. 

करते जाओ मेरे प्यारे अपने पूरे प्रयास मान लो जान लो जान लो मान लो, 

लाला लाला लाला ललाला ललाला मेरे दिल कह रहा है तुम बनोगे महान.

करते जाओ तुम प्रयास मेरी बेटी मेरे बेटे मुझको तुम पे है नाज़,

है मुझे तो हमेशा पूरा तुम पे विश्वास करते जाओगे तुम अपने सारे काज. 

न हो कोई खलिश न रहे रंजिश क्यूंकि तुमको तो पाना इस जहाँ पे है राज़, 

मेहनत का नहीं है कोई और सानी हर तरफ से जरूर आएगी ये आवाज. 

मान लो जान लो जान लो मान लो मेरे नौनिहालों तुम हो मेरी परवाज,

बढ़ते ही रहो अपनी राह पर न परेशान हो कभी किसी चाह पर.

ये समय का तकाजा जो  बढ़ा वो दिल का राजा,

जो छूट गया पीछे परवाह न कर एक दिन मिल ही जायेगा किसी  राह पर.

आज के दिन तो सिर्फ मेहनत का समय है और अपने भटकावों को भूलने का,

दिन आएगा जब होगी पूरी अपनी आस और तुम होंगे सबकी नज़रों के खास.

ओ वीर बालक तुम डटे ही रहो तुम लगे ही रहो, 

न डरो किसी भी चीज से क्यूंकि ऐसी कोई बात तुमको आएगी न रास. 

मान लो जान लो जान लो मान लो मेरी बेटी मेरे बेटे तुम हो मेरा प्रकाश, 

आओ मेरे प्राण प्यारो करलूं तुमको दुलार मेरी आँखों के तारों नहीं मानेंगे हम हार.

 

                                                                                       योगेन्द्र खोखर



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