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25 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोगीबील पुल से गुजरने वाली पहली यात्री रेलगाड़ी को हरी झंडी दिखाकर देश के सबसे लंबे इस रेल सह सड़क पुल का शुभारंभ करेंगे. इसके साथ ही असम और अरुणाचल प्रदेश का 21 साल का लंबा इंतजार भी खत्म हो जाएगा. दरअसल, ब्रह्मपुत्र नदी पर डबल डेकर रेल और रोड ब्रिज बनकर तैयार है. इससे दो राज्यों के बीच यातायात सरल हो जाएगा.

कुल 4.9 किलोमीटर लंबे इस पुल की मदद से असम के तिनसुकिया से अरुणाचल प्रदेश के नाहरलगुन कस्बे तक की रेलयात्रा में लगने वाले समय में 10 घंटे से अधिक की कमी आने की उम्मीद है. यहां तिनसुकिया-नाहरलगुन इंटरसिटी एक्सप्रेस हफ्ते में पांच दिन चलेगी. वहीं इससे उत्तर पूर्वी सीमा पर तैनात सेना को भी एक जगह से दूसरी जगह जाने में सहूलियत हासिल होगी. ये देश का सबसे लंबा रेल-रोड ब्रिज है. इस ब्रिज की आधारशिला 1997 में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने रखी थी और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 2002 में इस ब्रिज के निर्माण को हरी झंडी दिखाई थी.

पूर्वोत्तर फ्रंटियर रेलवे के प्रवक्ता नितिन भट्टाचार्य ने बताया, 'मौजूदा समय में इस दूरी को पार करने में 15 से 20 घंटे का समय की तुलना में अब इसमें साढ़े पांच घंटे का समय लगेगा. इससे पहले यात्रियों को कई बार रेल भी बदलनी पड़ती थी.' कुल 14 कोचों वाली यह चेयर कार रेलगाड़ी तिनसुकिया से दोपहर में रवाना होगी और नाहरलगुन से सुबह वापसी करेगी. बोगीबील पुल असम के डिब्रूगढ़ जिले में ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिण तट को अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती धेमाजी जिले में सिलापाथर को जोड़ेगा.

यह पुल और रेल सेवा धेमाजी के लोगों के लिए अति महत्वपूर्ण होने जा रही है क्योंकि मुख्य अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और हवाई अड्डा डिब्रूगढ़ में हैं. इससे ईटानगर के लोगों को भी लाभ मिलेगा क्योंकि यह इलाका नाहरलगुन से केवल 15 किलोमीटर की दूरी पर है. पीएम मोदी दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की वर्षगांठ के मौके पर इस ‘बोगीबील पुल’ पर रेल आवागमन की शुरुआत करेंगे. यह दिन केंद्र सरकार के जरिए ‘सुशासन दिवस’ के रूप में भी मनाया जाता है.



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