9 दिनों के उपवास पर हैं पीएम मोदी, 28 सालों से रख रहै हैं व्रत, नहीं बदलेगा काम का रुटीन

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवरात्रि शुरू होने और मणिपुरी उत्सव मेरा चाओरेन होउबा के अवसर पर आज देशवासियों को बधाई दी. मोदी ने एक ट्वीट में कहा, ‘सभी को नवरात्रि की शुभकामनाएं.’ एक अन्य ट्वीट में उन्होंने देवी शैलपुत्री की स्तुति के वीडियो का एक लिंक साझा किया. उन्होंने लिखा, ‘नवरात्रि के पहले दिन हम मां शैलपुत्री की पूजा करते हैं. यहां उन्हें समर्पित एक स्तुति है.’ एक अन्य संदेश में मोदी ने कहा, ‘मेरा चाओरेन होउबा के अवसर पर मणिपुर के लोगों को मेरी ओर से शुभकामनाएं. मैं कामना करता हूं कि इस उत्सव से समाज में सौहार्द की भावना बढ़े.’ यह पारंपरिक त्योहार राज्य में सभी समुदायों के बीच एकता और भाईचारे की भावना को बढ़ावा देता है.

देशवासी जानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नवरात्र के उत्सव को अलग तरह से मनाते हैं. वह इस दौरान उपवास पर रहते हैं और सिर्फ तरल पदार्थ ही पीते हैं. मोदी इस बार भी व्रत पर हैं. नवरात्र और मोदी के बारे में देशवासी बहुत कुछ जानते हैं. नवरात्र में पीएम मोदी अगर कुछ लेते हैं, तो सिर्फ पानी. मोदी के उपवास का ये सिलसिला चार दशकों से भी अधिक समय से जारी है. हालांकि व्रत के दौरान मोदी की दिनचर्या में कोई खास फर्क नहीं आता. इस बार मोदी जहां नवरात्र के पहले दिन सहकार भारती के संस्थापक और आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक रहे स्वर्गीय लक्ष्मण राव इनामदार के जन्मशताब्दी समारोह में हिस्सा लेने जा रहे हैं तो शुक्रवार और शनिवार को अपने लोकसभा क्षेत्र वाराणसी में दर्जनों कार्यक्रमों में शिरकत करने वाले हैं.

नवरात्र में व्रत रखने के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ में काफी समानता है. दोनों नेता नवरात्र में पूरे नौ दिन व्रत रखते हैं. इस दौरान दोनों अन्न ग्रहण नहीं करते हैं. सीएम आदित्यनाथ नौ दिन के व्रत के बाद नवमी को कन्या पूजन के साथ व्रत का समापन करते हैं. यागी भी पीएम मोदी की तरह ही 21 सितम्बर से 29 सितम्बर तक नवरात्र का व्रत रखेंगे और अन्न ग्रहण नहीं करेंगे. योगी आदित्यनाथ का आध्यात्म से गहरा नाता है और पूजा पाठ उनकी दिनचर्या का हिस्सा है, लेकिन नवरात्र के समय इसका खास महत्व होता है. शारदीय नवरात्र के दौरान तो योगी नौ दिन तक गोरखपुर मठ में ही रहते हैं और कई तरह की पूजा करते हैं. सिर्फ एक बार ही ये परंपरा टूटी है जब कुछ वर्ष पूर्व एक ट्रेन हादसे के कारण उन्हें घटनास्थल पर जाना पड़ा था.



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