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लोकसभा चुनाव: मेरठ के बाद रुद्रपुर में गरजे पीएम मोदी, कहा- विरोधी और दुश्मन सुन लें, हम डरने वाले नहीं डटने वाले हैं

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लोकसभा चुनाव 2019 के चुनाव प्रचार में जुटे पीएम मोदी मेरठ के बाद उत्तराखंड के रुद्रपुर पहुंचे. पीएम मोदी ने रैली की शुरुआत में शहीद उधम सिंह को नमन किया. पीएम मोदी ने कहा कि गुरु नानक जी के कदम जिस धरती पर पड़े उस धरती को मैं नमन करता हूं. पीएम मोदी ने कहा कि इस क्षेत्र के विकास के लिए जिस प्रकार पंजाब और देश के अन्य हिस्से से आए लोगों ने क्षेत्र के विकास के लिए काम किया है वह एक भारत श्रेष्ठ भारत का उदाहरण है.

पीएम मोदी ने कहा कि इस रैली में आए पुराने साथियों ने यहां सरकार के कामकाज को देखा है. आपने पहले की कांग्रेस सरकारों के कामकाज को भी देखा है. बीजेपी और कांग्रेस के संस्कारों से आप अच्छे से परिचित है. पहले की स्थिति को याद कीजिए जब सड़कें खराब थी, जाम लगा रहता था. पहले यहां के लोगों को सड़कों के आभाव में मीलों पैदल चलना पड़ता था. इसी कारण से इस क्षेत्र में पलायन हुआ. याद करिए घोटालों की वजह से उत्तराखंड की पहचान क्या हो गई थी. कभी राहत के नाम पर घोटाला, कभी आबकारी घोटाला, कभी खनन घोटाला, कांग्रेस के कल्चर ने उत्तराखंड को तबाह कर दिया था.

पीएम मोदी ने कहा कि यहां के कांग्रेस नेता पहले दिल्ली में हाजिरी लगाने जाते थे. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सीएम हरीश रावत ने केवल एक ही परिवार के रोजगार के लिए काम किया. पीएम मोदी ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने जिस उत्तराखंड का सपना देखा था हम उसे सच करने में जुटे है. पीएम मोदी ने कहा कि उत्तराखंड में चार धाम के साथ मैं एक धाम और जोड़ता हूं. वो धाम है सैनिक धाम, यहां हर दूसरा घर सैनिक का है. इस सैनिक धाम उत्तराखंड को मेरा कोटि कोटि नमन. 

पीएम मोदी ने कहा कि मैं आप से कुछ गंभीर सवाल पूछना चाहता हूं. 'सर्जिकल स्ट्राइक के बाद हमारे वीर जवानों की वीरता पर सवाल उठाना क्या सही था? जब आतंकियों को घर में घुसकर मारा गया तो हमारे वीर जवानों पर इस प्रकार के सवाल करना ठीक था? क्या हमारे सेनाध्यक्ष को गाली देना सही था? हमारे वायुसेना के प्रमुख को झूठा कहना सही था? पाकिस्तान के हीरो बनने की चाहत में देश का अपमान करने वालों को क्या देश की जनता माफ करेगी?' 

पीएम मोदी ने कहा, 'हमारे विरोधी भी सुन लें और दुश्मन भी सुन लें. हम डरने वाले नहीं डटने वाले है. डरने का काम तो कांग्रेस के नामदारों का है. ये वो लोग है जिनका खून कभी नहीं खौला है. ये वो लोग है जिन्होंने सेना को कोई सहूलियत नहीं दी थी. सेना बुलेट प्रूफ जैकेट मांगती थी, वन रैंक वन पेंशन मांगती थी, लेकिन कुछ नहीं दिया. इन्होंने तो सेनाध्यक्ष पर ही केस कर दिया था. हथियारों के सौदे 10 साल तक फंसे रहे. लेकिन कांग्रेस की सरकार कोई सुनवाई नहीं कर रही थी. क्योंकि ध्यान रक्षा सौदों की दलाली में मलाई खाने में लगा रहता था.'



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