पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट का आदेश, ‘‘घृणा, चरमपंथ और आतंकवाद’’ फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करे सरकार

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लगाई इमरजेंसी, मैक्सिको बोर्डर पर बनाई जाएगी दीवार

अमेरिका-मैक्सिको सीमा पर दीवार बनाने पर अड़े डोनाल्ड ट्रंप, जल्द करेंगे आपातकाल की घोषणा

Pulwama Terror Attack: अमेरिका की पाक को चेतावनी, आतंकवाद को पनाह देना बंद करे, पाकिस्तान ने गंभीर चिंता का विषय बताया

डोनाल्ड ट्रंप ने 'स्टेट ऑफ यूनियन' में अमेरिका-मैक्सिको सीमा पर दीवार बनाने का किया वादा, किम जोंग से फिर करेंगे मुलाकात

क्रिप्टोकरेंसी कंपनी के CEO की मौत से निवेशकों के 190 मिलियन डॉलर हुए लॉक, किसी को नहीं पता पासवर्ड

फर्जी यूनिवर्सिटी मामला: अमेरिका ने कहा- हिरासत में लिए गए 130 छात्रों को पता था कि वे अपराध कर रहे हैं

2019-02-06_PakSC.jpg

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को ‘‘घृणा, चरमपंथ और आतंकवाद’’ फैलाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश देते हुए बुधवार को सशस्त्र बलों के सदस्यों के, राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने पर रोक लगा दी और आईएसआई जैसी सरकारी एजेंसियों को कानून के दायरे में काम करने के निर्देश दिए.

शीर्ष न्यायालय की दो सदस्यीय पीठ ने कट्टरपंथी तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) और अन्य छोटे समूहों के फैजाबाद में साल 2017 में दिए गए धरने के मामले में फैसला सुनाते हुए यह आदेश दिया. न्यायमूर्ति काजी फैज़ ईसा और न्यायमूर्ति मुशीर आलम की पीठ ने कहा, ‘‘हम संघीय और प्रांतीय सरकारों को उन लोगों पर नजर रखने के निर्देश देते हैं जो घृणा, चरमपंथ और आतंकवाद की वकालत करते हैं. हम दोषियों को कानून के अनुसार दंड देने के निर्देश देते हैं.’’

न्यायालय ने सेना द्वारा चलाई जा रही इंटर सर्विसेज इंटैलिजेंस (आईएसआई) समेत सभी सरकारी एजेंसियों और विभागों को कानून के दायरे के भीतर काम करने के भी निर्देश दिए. उसने सशस्त्र बलों के सदस्यों पर ऐसी किसी भी राजनीतिक गतिविधि में शामिल होने पर रोक लगा दी जो किसी पार्टी, गुट या व्यक्ति का समर्थन करती हो.

कई विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले साल के आम चुनाव में देश की शक्तिशाली सेना ने प्रधानमंत्री इमरान खान का समर्थन किया था. शीर्ष न्यायालय ने दूसरों को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से दिए जाने वाले फतवा जैसे धार्मिक आदेशों को भी अमान्य करार दिया.



loading...