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आर्मी चीफ बिपिन रावत के ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रैटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) और बांग्लादेशी शरणार्थियों पर दिए बयान पर विवाद बढ़ गया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलिमीन (एआईएमआईएम) के चीफ असदुद्दीन ओवैसी का कहना है कि राजनीतिक दलों पर स्टेटमेंट देना आर्मी चीफ का काम नहीं है। उधर, बीजेपी और कांग्रेस ने कहा कि आर्मी चीफ के बयान पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने असम के हालात को देखते हुए यह बात कही। इस बीच आर्मी ने बिपिन रावत के बयान को सही बताया है। बता दें कि उन्होंने बुधवार को कहा था कि वोट बैंक की राजनीति के चलते ही एआईयूडीएफ संगठन असम में बीजेपी से बहुत तेजी से बढ़ा है।

आर्मी ने विवाद बढ़ने के बाद बिपिन रावत के बयान का सही बताया है। आर्मी ने कहा कि उनके बयान में कुछ भी राजनीति नहीं है और ना ही यह किसी धर्म से जुड़ा है। वहीं, बीजेपी और कांग्रेस का कहना है कि किसी पार्टी को आर्मी चीफ के बयान पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा कि सेना पर बयानबाजी नहीं होनी चाहिए। ओवैसी को बेवजह बयान देने की आदत है। बीजेपी नेता सुब्रमण्यन स्वामी ने कहा कि आर्मी चीफ ने समस्या के बारे में जानकारी दी है। इस पर विवाद नहीं होना चाहिए।

पूर्वोत्तर सीमा सुरक्षा को लेकर दिल्ली में हुए एक सेमिनार में आर्मी चीफ बिपिन रावत ने कहा- "असम में एक पार्टी AIUDF है। अगर आप देखें तो जिस तरह से बीजेपी 1984 में 2 सीटों से बढ़कर आज यहां तक पहुंची है। उससे ज्यादा तेजी से यह पार्टी बढ़ी है।" इस दौरान उन्होंने मुस्लिमों की आबादी को लेकर बनी एक रिपोर्ट का हवाला भी दिया। कुछ इलाकों में शरणार्थियों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। सरकार नॉर्थईस्ट पर ध्यान दे रही है। वहां विकास किया जाएगा। उस क्षेत्र में रहने वाले हर शख्स का हम सम्मान करते हैं, चाहें वे किसी जाति, धर्म और लिंग के हों। सबसे अच्छा तरीका तो ये है कि वहां रहने वाले लोगों को अन्य भागों में रहने वाले लोगों से जोड़ा जाए और फिर विकास किया जाए।''

एआईएमआईएम के ओवैसी ने आर्मी चीफ के बयान पर विरोध जताया। उन्होंने कहा कि आर्मी चीफ को इस तरह से किसी राजनीतिक पार्टी के विकास पर सवाल खड़ा करने की इजाजत लोकतंत्र और संविधान नहीं देता। उन्हें ऐसे बयानों से बचना चाहिए। आर्मी चुनी हुई लीडरशिप के तहत काम करती है।

बिपिन रावत ने कहा- हमने वहां कुछ लोगों की पहचान की है, जो परेशानी पैदा कर रहे हैं। वो अवैध शरणार्थी भी हो सकते हैं। असम में बाहर से मुस्लिम आबादी बड़ी तादाद में आ रही है। ये लोग काफी पहले ही आ चुके हैं। ये लोग अब असम और नॉर्थईस्ट के इलाकों पर भी दावा करने लगे हैं। बांग्लादेश से लगातार माइग्रेशन हो रहा है। बांग्लादेश से लोगों के आने की 2 वजहें हैं- एक, वहां रहने की जगह की कमी है। दूसरा- मानसून के दौरान वहां एक बड़ा हिस्सा पानी में डूबा रहता है। एक और मुद्दा है- प्लान्ड माइग्रेशन हो रहा है। इस माइग्रेशन की वजह हमारा पश्चिमी इलाके का पड़ोसी (पाक) है। इसके जरिए वह एक प्रॉक्सी वॉर छेड़े हुए है। इसमें हमारे उत्तरी इलाके का पड़ोसी (चीन) इसमें मदद कर रहा है। माइग्रेशन के चलते पूरे इलाके में समस्या बनी हुई है।

ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रैटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) संगठन 2005 में बना था। इसके चीफ बदरुद्दीन अजमल हैं। वे धुबरी लोकसभा सीट से सांसद हैं। इस संगठन के राज्य में 13 विधायक हैं। वहीं, 3 सांसद भी हैं। इस संगठन को बांग्लादेशी शरणार्थियों का समर्थन प्राप्त है। अजमल पहले इत्र का कारोबार करते थे। फिलहाल उनकी पार्टी राज्य में दूसरे नंबर की बड़ी पार्टी बन गई है।



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