ई-कॉमर्स मार्केट में नकली प्रोडक्ट का खेल, सरकार लगाएगी लगाम, ला सकती है ये नियम

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एक लाख करोड़ के भारतीय ई-कॉमर्स मार्केट में नकली प्रोडक्ट की भरमार बढ़ती जा रही है. हर तीसरे व्यक्ति को ऑनलाइन शॉपिंग में नकली प्रोडक्ट मिल रहे हैं. इसके बावजूद कंपनियों से लेकर उनके सेलर्स पर किसी तरह की कोई एक्शन नहीं हो पा रहा है. ऐसा इसलिए है क्योंकि मौजूदा कानून में ऐसे लूपहोल है कि कस्टमर के अधिकार भगवान भरोसे हैं. 

ई-कॉमर्स के लि‍ए बनी वि‍देशी प्रत्‍यक्ष नि‍वेश पॉलि‍सी के मुताबि‍क , वि‍देशी कंपनी की स्‍वामि‍त्व वाली ई-कॉमर्स कंपनी अपने प्‍लेटफॉर्म पर बि‍कने वाले प्रोडक्‍ट्स पर वारंटी या गारंटी का ऑफर्स नहीं दे सकती है. ऐसे में कि‍सी भी तरह का अति‍रि‍क्‍त वादा गैरकानूनी है. यह कंज्‍यूमर्स के लि‍ए दुर्भाग्‍यपूर्ण हैं.

एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि ऑनलाइन की तुलना में रि‍टेल स्‍टोर्स पर नकली प्रोडक्‍ट्स को पकड़ना आसान है. वहीं, लोकलसर्कि‍ल के एक सर्वे के पहले पोल में 6,923 लोगों में से 38 फीसदी कंज्‍यूमर्स ने कहा कि उनहें बीते एक वर्ष में ई-कॉमर्स साइट से नकली प्रोडक्‍ट मि‍ले हैं. 45 फीसदी ने कहा कि उनके साथ ऐसा नहीं हुआ है जबकि 17 फीसदी ने कहा है कि वह इसके बारे में कुछ नहीं जानते. 

लोगों ने जब यह पूछा गया कि कौन सी बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी ने बीते एक साल में नकली प्रोडक्‍ट भेजा है, तो जवाब में 12 फीसदी ने स्‍नैपडील, 11 फीसदी ने अमेजन और 6 फीसदी ने कहा फ्लि‍पकार्ट. 71 फीसदी लोग ऐसे हैं जो या तो ऑनलाइन शॉपिंग नहीं करते या उनहें नकली प्रोडक्‍ट नहीं मि‍ला है.   

बता दें कि आईटी एक्‍स 2000 ने ऑनलाइन ट्रांसजैक्शन और इंटरमीडि‍यटरीज की जि‍म्‍मेदारि‍यों और व्‍यवहार को रेग्‍युलेटर करने के लि‍ए वि‍शि‍ष्‍ट नि‍यमों का उल्‍लेख कि‍या गया है, इसमें ये अहम है. एक इंटरमीडि‍यटरीज को दूसरे के आईपीआर के उल्‍लंघन के खि‍लाफ सेलर्स को चेतावनी देनी होगी. उसे इस तरह के उल्‍लंघन को जानबूझ कर होने की अनुमति नहीं देनी चाहि‍ए. अगर उल्‍लंघन का पता चलता है तो इंटरमीडि‍यरीज को कानूनी तौर पर 36 घंटे के भीतर प्रोडक्‍ट या जानकारी को हटाना होगा. 

वहीं, ई-कॉमर्स प्‍लेटफॉर्म पर बिकने वाले नकली प्रोडक्‍ट्स को रोकने और कंज्‍यूमर्स को रिफंड देने के लि‍ए सरकार एक प्रणाली बनाने पर वि‍चार कर रही है. इस तरह के सि‍स्‍टम के लि‍ए बातचीत वैचारि‍क स्‍तर पर है. इस सि‍स्‍टम को 'कैशबैक' कहा जा सकता है. 

बता दें कि फ्लि‍पकार्ट, स्‍नैपडील और अमेजन जैसी दूसरी बड़ी ई-कॉमर्स कंपनि‍यां वि‍भि‍न्‍न मामलों में अधि‍कतम 30 दि‍न के भीतर प्रोडक्‍ट रीप्‍लेस या रि‍फंड करने के लि‍ए प्रति‍बध हैं. लेकि‍न इन सभी प्‍लेटफॉर्म्‍स पर कई सारे प्रोडक्‍ट अब भी रीफंड पॉलि‍सी से बाहर हैं, वहीं, कुछ माममों में रीफंड भी नहीं दि‍या जाता है. इसके अलावा , कस्‍टमर को रि‍फंड तभी दि‍या जाता है जब वह साबि‍त करते हैं कि प्रोडक्‍ट नकली है.
 



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