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अस्पताल मांगता रहा आधार कार्ड, इलाज के अभाव में करगिल शहीद की विधवा की मौत

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हरियाणा के सोनीपत के एक प्राइवेट अस्पताल की लापरवाही का मामला सामने आया है. दरअसल, अस्पताल प्रबंधन ने एक महिला मरीज को सिर्फ इसलिए भर्ती नहीं किया, क्योंकि उसके पास आधार कार्ड की ओरिजिनल कॉपी नहीं थी. इलाज के अभाव में दम तोड़ देने वाली महिला कारगिल शहीद की विधवा थीं.

महिला के बेटे पवन कुमार ने बताया कि मैं अपनी मां को गंभीर हालत में अस्पताल लेकर आया था. अस्पताल प्रबंधन ने मुझसे आधार कार्ड मांगा, लेकिन मेरे पास आधार कार्ड की ओरिजिनल कॉपी नहीं थी तो मैंने उन्हें अपने फोन में आधार कार्ड दिखा दिया था.

पवन ने बताया कि मैंने अस्पताल प्रबंधन को कहा कि मैं एक घंटे में आधार की ओरिजिनल कॉपी ले आऊंगा तब तक आप इलाज शुरू करें लेकिन उनलोगों ने इलाज करने से इनकार कर दिया.

उधर, अस्पताल के एक डॉक्टर का कहना है कि हमने इलाज से इनकार नहीं किया. इस बात पर गौर किया जाए कि वह(पवन) मरीज को अस्पताल लेकर आया ही नहीं, हमने किसी को भी आधार की वजह से इलाज करने के लिए नहीं रोका है, आधार जरूरी है लेकिन इलाज के लिए नहीं, सिर्फ कागजी कार्रवाई के लिए. 

गौरतलब है कि सोनीपत के महलाना गांव के पवन के पिता लक्ष्मण दास 1999 में करगिल युद्ध में शहीद हुए थे. पिछले कई दिनों से बीमार चल रही पवन की मां शकुंतला देवी की हालत गुरुवार शाम गंभीर हो गई. परिजन उन्हें सेना कार्यालय स्थित अस्पताल ले गए जहां से उन्हें निजी अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई. लेकिन प्राइवेट अस्पताल की लापरवाही के कारण इलाज में देरी हुई और शकुंतला देवी की मौत हो गई.

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